Ayodhya Politics : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकारों पर आक्रामक रुख अपनाते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से गंभीर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर दो सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए उन्होंने अयोध्या से जुड़े कथित विवादों को ‘लंका कांड’ की संज्ञा दी। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि अयोध्या में ही बीजेपी के अहंकार का अंत होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘दानभक्तों’ का मुखौटा अब पूरी तरह उतर चुका है और प्रभु की अलौकिक शक्ति ने अपना चमत्कार दिखा दिया है। उनके अनुसार, बीजेपी के लिए जो काल ‘अमृतकाल’ कहा जा रहा था, वह अब उनके पतन का कारण बन गया है।

‘दान और चंदे’ को लेकर सरकार पर तीखे सवाल
अखिलेश यादव ने कटाक्ष किया कि जनता अब ‘चढ़ावा, चंदा और दान’ में हुई कथित चोरी से आहत है। उन्होंने कहा कि बीजेपी अब इस्तीफे और त्यागपत्र के शब्दों का खेल खेल रही है, जबकि जनता को इन सबके पीछे छिपी सच्चाई पता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह तो अभी केवल भाजपाइयों और उनके सहयोगियों के काले कारनामों का ‘प्रथम अध्याय’ है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए और उन सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए जो सरकारी धन या ट्रस्ट के नाम पर हेराफेरी में शामिल हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आरोपियों को भागने से रोकने के लिए राज्य की सीमाओं को सील कर दिया जाना चाहिए।

‘भगवान के ऑडिट’ से कोई नहीं बचेगा
अपने आक्रामक तेवर को जारी रखते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी का यह गिरोह ‘भगवान के ऑडिट’ से किसी भी सूरत में नहीं बच पाएगा। उन्होंने कहा कि अब केवल ट्रस्ट ही नहीं, बल्कि ‘केयर फंड’ और अन्य अनरजिस्टर्ड संस्थाओं को भी अपने कुकृत्यों का पूरा हिसाब-किताब जनता के सामने रखना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी, संघ, सभा और वाहिनी जैसे विभिन्न संगठनों में अब आपस में ही एक-दूसरे की पोल खुलने लगी है। भ्रष्टाचार की इस लड़ाई में अब वे लोग खुद ही अपनी सच्चाई सामने ला रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि यह राजनीतिक लड़ाई अब निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है।
नीट परीक्षा और ग्राम प्रधानों के मुद्दे पर घेरा
नीट (NEET) मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं पर भी अखिलेश यादव ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि छात्र अब यह मांग कर रहे हैं कि जिस तरह से अन्य पदों पर इस्तीफे हो रहे हैं, उसी तरह नीट परीक्षा में धांधली के लिए जिम्मेदार ‘लीकाधिपति’ पर भी कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के ग्राम प्रधानों के कार्यकाल संबंधी फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा असंवैधानिक करार दिए जाने का भी जिक्र किया। अखिलेश ने पूछा कि जनता जानना चाहती है कि असंवैधानिक काम करने और संविधान का उल्लंघन करने के लिए आखिर सजा क्या होती है।
राजनीतिक माहौल गरमाया, बीजेपी सरकार पर दबाव
अखिलेश यादव के इन बयानों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी बढ़ा दी है। एक तरफ जहां बीजेपी विकास और सुशासन के दावे कर रही है, वहीं विपक्ष लगातार भ्रष्टाचार, पेपर लीक और प्रशासनिक विफलताओं को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। ग्राम प्रधानों के प्रशासनिक नियुक्ति के मामले में हाईकोर्ट की फटकार ने सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अखिलेश यादव के ये पोस्ट स्पष्ट संकेत देते हैं कि आने वाले समय में सपा सरकार की हर नीति और कार्यप्रणाली को लेकर सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक तीखा विरोध दर्ज कराएगी।











