Chhattisgarh Farmers : छत्तीसगढ़ सरकार ने मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान राज्य के लाखों किसानों को एक बड़ी राहत प्रदान की है। कृषि विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए रासायनिक खाद—जैसे यूरिया, डीएपी (DAP) और अन्य उर्वरकों—को प्राप्त करने के लिए लागू ई-टोकन और पूर्व-पंजीकरण की जटिल प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। अब किसानों को खाद लेने के लिए लंबी कतारों में लगने या डिजिटल टोकन का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं होगी। किसान अब सीधे अपनी नजदीकी सहकारी समिति या प्राथमिक कृषि साख समिति (सोसायटी) जाकर निर्धारित नियमों के अंतर्गत अपनी आवश्यकतानुसार खाद प्राप्त कर सकेंगे।

खाद की पर्याप्त उपलब्धता बनी टोकन व्यवस्था खत्म करने का आधार
कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने इस निर्णय के पीछे के कारणों को स्पष्ट करते हुए बताया कि वर्तमान में प्रदेश भर के गोदामों में खाद का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है। पूर्व में खाद की सीमित आपूर्ति के कारण ‘टोकन व्यवस्था’ लागू की गई थी, लेकिन पर्याप्त स्टॉक होने के कारण इसकी आवश्यकता अब महसूस नहीं की जा रही थी। इस व्यवस्था को समाप्त करने का मुख्य उद्देश्य किसानों को बार-बार केंद्रों के चक्कर काटने से बचाना है। अब किसान एक ही बार में अपनी पूरी जरूरत के अनुसार खाद ले सकेंगे, जिससे उनका समय और श्रम दोनों बचेगा और खेती-किसानी के कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होगी।

भूमि के रकबे के आधार पर पारदर्शी वितरण की नई नीति
कृषि विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, खाद का वितरण पूरी तरह से किसान की भूमि के रकबे (क्षेत्रफल) के आधार पर किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक किसान को उसकी खेती के आकार और आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक समय पर उपलब्ध हो। इस नीति में विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो। सरकार का प्रयास है कि वितरण प्रक्रिया को न केवल सरल बनाया जाए, बल्कि इसे पूरी तरह पारदर्शी भी रखा जाए ताकि किसी भी स्तर पर भेदभाव न हो।
कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त निगरानी और औचक निरीक्षण
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वितरण प्रक्रिया को सुगम बनाने के साथ-साथ खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए विभाग बेहद सख्त है। इस संबंध में कृषि विभाग की विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो लगातार औचक निरीक्षण करेंगी। यदि कोई भी समिति या व्यक्ति खाद की अवैध बिक्री या नियमों के उल्लंघन में लिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। जमाखोरी को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है ताकि खाद सीधे वास्तविक किसानों तक ही पहुंचे।
खेती-किसानी के लिए बिना बाधा समय पर उर्वरक की उपलब्धता
इस निर्णय से प्रदेश के कृषि क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है। टोकन के झंझट और लंबी प्रतीक्षा से मुक्ति मिलने के बाद किसान अब पूरी तरह से अपनी फसल की बुवाई और देखरेख पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। खरीफ सीजन में समय पर खाद मिलने से उत्पादन पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। राज्य सरकार का यह कदम कृषि को लाभ का धंधा बनाने और किसानों के जीवन को सरल बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल माना जा रहा है।
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