Sukma Independence Day 2026: देशभर में आज 80वां स्वतंत्रता दिवस देशभक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हालांकि, छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित रहे 50 गांवों के लिए इस बार का स्वतंत्रता दिवस कुछ अलग और बेहद खास है। इन गांवों में पहली बार ग्रामीण बिना किसी डर या दहशत के खुले तौर पर तिरंगे के नीचे स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाने जा रहे हैं। लंबे समय तक हिंसा और नक्सली प्रभाव से प्रभावित रहे इन इलाकों में अब राष्ट्रीय पर्व को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है।


कभी राष्ट्रीय पर्व पर दिखते थे काले झंडे
सुकमा के इन क्षेत्रों में कभी नक्सली प्रभाव के कारण स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर अलग माहौल देखने को मिलता था। कई इलाकों में काले झंडों का दबदबा रहता था और ग्रामीणों के लिए तिरंगा फहराना आसान नहीं था। राष्ट्रीय पर्व मनाने को लेकर लोगों के मन में डर बना रहता था। अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और प्रशासन की पहुंच बढ़ने के बाद इन गांवों की तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है।

31 मार्च के बाद बदली नक्सल प्रभावित इलाकों की तस्वीर
नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों और प्रशासन की लगातार कार्रवाई के बाद सुकमा के कई इलाकों में परिस्थितियां तेजी से बदली हैं। 31 मार्च के बाद नक्सल प्रभाव से मुक्त हुए क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया और प्रशासनिक गतिविधियों का विस्तार हुआ। जिन गांवों में पहले सरकारी कार्यक्रम आयोजित करना चुनौतीपूर्ण माना जाता था, वहां अब प्रशासन और ग्रामीण मिलकर राष्ट्रीय पर्व की तैयारियां कर रहे हैं।
तिरंगे को सलामी देने को लेकर ग्रामीणों में उत्साह
इस स्वतंत्रता दिवस पर इन गांवों के ग्रामीण पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देंगे। बुजुर्गों से लेकर छोटे बच्चों तक में इस आयोजन को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है। उनके लिए यह केवल झंडारोहण का सामान्य कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लंबे समय तक भय और बंदिशों के बीच रहने के बाद खुले वातावरण में आजादी का पर्व मनाने का अवसर है। गांवों में समारोह को लेकर तैयारियां भी जोर-शोर से की गई हैं।
काले झंडे से तिरंगे तक पहुंचा बस्तर
बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में लंबे समय तक राष्ट्रीय पर्वों पर विरोध और बंद का असर देखने को मिलता रहा। कई जगहों पर ग्रामीण तिरंगा फहराने से भी बचते थे। अब वही तस्वीर बदलती नजर आ रही है। जहां कभी काले झंडे और हिंसा का साया दिखाई देता था, वहां अब तिरंगा शान से लहरा रहा है और राष्ट्रगान की आवाज सुनाई दे रही है। यह बदलाव ग्रामीणों के लिए उम्मीद और विश्वास का प्रतीक बन रहा है।

ग्रामीणों के लिए आजादी का जश्न हुआ खास
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी स्वतंत्रता दिवस को लेकर उनके मन में उत्साह रहता था, लेकिन परिस्थितियां ऐसी नहीं थीं कि वे खुले तौर पर कार्यक्रम आयोजित कर सकें। इस बार माहौल अलग है। ग्रामीण बिना भय के तिरंगा फहराने और राष्ट्रीय पर्व मनाने को लेकर उत्साहित हैं। खासकर बच्चों में स्वतंत्रता दिवस को लेकर काफी उमंग दिखाई दे रही है।
विकास के साथ गांवों तक पहुंच रहा राष्ट्रीय पर्व
सुकमा के इन 50 गांवों में बदलती परिस्थितियां बस्तर में हो रहे व्यापक बदलाव की तस्वीर पेश करती हैं। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ प्रशासन की पहुंच बढ़ रही है और सड़क, सरकारी योजनाओं तथा अन्य विकास कार्यों का विस्तार भी हो रहा है। इसी बदलाव के बीच राष्ट्रीय पर्व भी अब उन गांवों तक पहुंच रहा है, जहां कभी इसे मनाना मुश्किल माना जाता था।
तिरंगे के साथ नई शुरुआत का संदेश
देश के लिए यह 80वां स्वतंत्रता दिवस है, लेकिन सुकमा के इन 50 गांवों के लिए यह एक नए अध्याय की शुरुआत जैसा है। वर्षों तक डर और नक्सली प्रभाव से जूझने के बाद अब ग्रामीण खुले आसमान के नीचे तिरंगे को सम्मान दे रहे हैं। काले झंडों से तिरंगे तक का यह सफर केवल एक दृश्य बदलाव नहीं, बल्कि सुरक्षा, विश्वास और विकास की नई उम्मीद का संदेश भी देता है।
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