PM Modi Seychelles Visit : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स की राजकीय यात्रा इन दिनों सुर्खियों में है, लेकिन चर्चा का केंद्र केवल कूटनीतिक संबंध नहीं, बल्कि एक 194 साल का ‘अल्डाबरा जाइंट कछुआ’ भी बन गया है। यात्रा के दौरान पीएम मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने विक्टोरिया स्थित नेशनल बॉटनिकल गार्डन का दौरा किया। वहां पीएम मोदी ने दुनिया के सबसे उम्रदराज जीवित जमीनी जीव माने जाने वाले इस विशाल कछुए को अपने हाथों से खाना खिलाया। इस दौरान खींची गई तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोरीं, लेकिन इन तस्वीरों के साथ ही देश में एक नया राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया।

जयराम रमेश का तंज: कांग्रेस ने याद दिलाया पुराना इतिहास
पीएम मोदी की इन तस्वीरों के वायरल होते ही कांग्रेस ने उन पर निशाना साधना शुरू कर दिया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक तीखी टिप्पणी की। उन्होंने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए लिखा कि जो नेता खुद को ‘विश्वगुरु’ कहलवाने में विश्वास रखते हैं, उनकी असलियत सामने आ गई है। रमेश ने कहा कि पीएम मोदी के कछुए को खोजने और उसे खाना खिलाने से बहुत पहले ही, डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने 2 अगस्त 2008 को ‘अल्डाबरा जाइंट कछुए’ पर एक स्मारक डाक टिकट जारी कर दिया था। कांग्रेस का यह दावा केंद्र सरकार पर राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है।

यात्रा का उद्देश्य और कछुओं के साथ भारत का नाता
प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के ‘गोल्डन जुबली नेशनल डे’ (आजादी के 50 साल पूरे होने) के समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने पहुंचे थे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देना है। बॉटनिकल गार्डन के दौरे के बाद पीएम मोदी ने कछुओं के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हुए भारत और सेशेल्स के बीच की गहरी दोस्ती का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह जीव केवल पर्यटन का आकर्षण नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच संबंधों का प्रतीक भी है। पीएम मोदी के अनुसार, 2014 में सेशेल्स ने भारत को दो कछुए तोहफे में दिए थे, जिन्हें कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर में रखा गया है। इसके बाद, सेशेल्स ने हैदराबाद चिड़ियाघर को भी कछुए उपहार स्वरूप प्रदान किए थे।
राजनीति बनाम कूटनीति: क्या है असली मुद्दा?
विपक्ष के हमले के बावजूद, विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि ऐसे दौरे प्रतीकात्मक होते हैं और इनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों को मानवीय स्तर पर जोड़ना होता है। कछुओं को खाना खिलाना या उनसे जुड़ी यादें साझा करना एक नरम कूटनीति (Soft Diplomacy) का हिस्सा है। हालांकि, भारतीय राजनीति में हर गतिविधि को चुनाव और राजनीतिक वर्चस्व से जोड़ने की परंपरा पुरानी है। जहां एक ओर बीजेपी समर्थकों के लिए यह पीएम का जीव-प्रेम और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का सम्मान है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे केवल एक पीआर स्टंट मानकर उस पर अपने पुराने कार्यों की छाप छोड़ने की कोशिश कर रहा है। अंततः, यह यात्रा भारत और सेशेल्स के संबंधों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है, बशर्ते राजनीतिक शोर इस कूटनीतिक सौहार्द को न दबा दे।











