FATF Meeting : आतंकवाद को संरक्षण देने के आरोपों से घिरे पाकिस्तान के लिए एक बार फिर मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत सरकार आतंकवाद वित्तपोषण निगरानी संस्था, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) पर यह दबाव बनाने की तैयारी में है कि वह अक्टूबर में आयोजित होने वाली अपनी आगामी बैठक में पाकिस्तान को पुनः ‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल करे। स्मरण रहे कि अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान ग्रे लिस्ट से बाहर निकल पाया था, जब उसने FATF के समक्ष 34 सूत्रीय कार्य योजना को पूरा करने का दावा किया था। उस समय पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग को रोकने के लिए अपने कानूनी और परिचालन ढांचे में व्यापक सुधार किए हैं।

पाकिस्तान की करतूतें: सबूतों के साथ फिर घेराबंदी की तैयारी
हालाँकि पाकिस्तान ने ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए सुधारों का ढोंग किया था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। भारत का स्पष्ट मानना है कि पाकिस्तान अभी भी आतंकवाद, विशेषकर भारत विरोधी गतिविधियों को सक्रिय रूप से समर्थन दे रहा है। पिछले साल अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ भयावह आतंकी हमला इसका सबसे बड़ा प्रमाण है, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। यह हमला पिछले कई वर्षों में नागरिकों पर हुआ सबसे घातक हमला था। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, भारत इस बार FATF के सामने पाकिस्तान की संलिप्तता को साबित करने के लिए नए ठोस सबूत पेश करने की योजना बना रहा है, जिसमें वीडियो फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य शामिल हैं।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सेना-आतंकी सांठगांठ के प्रमाण
भारत द्वारा पेश किए जाने वाले सबूतों में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान एकत्र की गई सामग्री अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती है। यह घटनाक्रम पाकिस्तानी सेना और आतंकवादी समूहों के बीच के गहरे और भयावह गठजोड़ को उजागर करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित एक आतंकवादी द्वारा मारे गए आतंकियों के अंतिम संस्कार में पाकिस्तानी सेना के सैन्यकर्मियों की भागीदारी और पाकिस्तानी जनरलों की उपस्थिति, यह स्पष्ट करती है कि वहां की सेना और आतंकी संगठन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यह सारी जानकारी तब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब हाल ही में भारतीय अधिकारी विवेक अग्रवाल को FATF का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति को मजबूत करता है।
क्या है FATF की ग्रे लिस्ट और इसके गंभीर परिणाम?
FATF की कार्यप्रणाली में ‘ग्रे लिस्ट’ और ‘ब्लैक लिस्ट’ दो प्रमुख सूचियाँ होती हैं। ग्रे लिस्ट उन देशों के लिए होती है जो आतंकी वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में विफल रहते हैं, उन पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी कड़ी कर दी जाती है। FATF की वेबसाइट के अनुसार, ग्रे लिस्ट में शामिल होना उस देश के लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ता है। ऐसे देशों को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और अन्य वैश्विक वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। साथ ही, विदेशी निवेश में भी भारी कमी आ जाती है। यदि पाकिस्तान को पुनः ग्रे लिस्ट में डाला जाता है, तो यह उसकी डगमगाती अर्थव्यवस्था के लिए एक और बड़ा झटका साबित होगा।
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