Ram Mandir Scam : अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी के मामले में हर दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में मुख्य आरोपी और राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पूर्व ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की संलिप्तता ने सबको हैरान कर दिया है। जांच एजेंसियों को मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, टिन्नू यादव ने मंदिर के चढ़ावे से चोरी की गई भारी-भरकम राशि को खपाने के लिए एक सुनियोजित साजिश रची थी। उसने इस अवैध कमाई को ठिकाने लगाने के लिए अयोध्या के बाहरी इलाके में एक बड़ी प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बनाई थी, ताकि वह मंदिर के पैसे को अपनी निजी संपत्ति में बदल सके।

तीन बीघा जमीन का एग्रीमेंट और करोड़ों का खेल
सूत्रों के मुताबिक, टिन्नू यादव ने अपने भतीजे मनीष के साथ मिलकर अयोध्या के तेंधा गांव में जमीन खरीदने की डील फाइनल की थी। इस शातिर आरोपी ने स्थानीय किसान हाकिम सिंह से लगभग तीन बीघा जमीन का सौदा किया था। यह डील डेढ़ से पौने दो करोड़ रुपये में तय हुई थी। टिन्नू ने बेहद चालाकी से इस सौदे को अपने एक रिश्तेदार के नाम पर आगे बढ़ाया था, ताकि जांच एजेंसियों और लोगों की निगाहों से बचा जा सके। योजना यह थी कि पहले जमीन का एग्रीमेंट कराया जाए और अगले 18 महीनों के भीतर धीरे-धीरे चोरी की रकम जुटाकर पूरी रजिस्ट्री करा ली जाए।

आलीशान फार्म हाउस और रिसॉर्ट बनाने का था सपना
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि टिन्नू यादव का इरादा सिर्फ जमीन खरीदना नहीं था, बल्कि वह इस तीन बीघा जमीन पर एक लग्जरी फार्म हाउस और भव्य रिसॉर्ट खड़ा करने का सपना देख रहा था। उसे पता था कि राम मंदिर के चढ़ावे से हर महीने लाखों रुपये की चोरी आसानी से की जा सकती है। इसी भरोसे पर उसने डेढ़ साल का समय तय किया था, ताकि चोरी की रकम से रिसॉर्ट का निर्माण कार्य भी शुरू हो सके। टिन्नू ने एक अपराधी की तरह अपनी काली कमाई को सफेद करने का पूरा खाका तैयार कर लिया था, ताकि वह भविष्य में एक रसूखदार व्यक्ति की तरह जीवन व्यतीत कर सके।
अयोध्या से दूर ‘सेफ जोन’ की तलाश
टिन्नू यादव ने जमीन के चयन में भी अपना ‘क्रिमिनल माइंड’ इस्तेमाल किया था। उसने जानबूझकर मुख्य अयोध्या शहर से काफी दूर तेंधा गांव को चुना, ताकि इस बेनामी संपत्ति की खबर प्रशासन या मीडिया के कानों तक न पहुंच सके। उसे लगता था कि शहर से दूर होने के कारण कोई भी इस भारी-भरकम निवेश पर ध्यान नहीं देगा और वह आसानी से कानून की आंखों में धूल झोंक पाएगा। फिलहाल, पुलिस और जांच एजेंसियां इस जमीन के एग्रीमेंट से जुड़े सभी दस्तावेजों को जब्त कर उनकी बारीकी से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का लक्ष्य इस पूरी ‘मनी ट्रेल’ (पैसे के स्रोत और लेनदेन) को उजागर करना है, ताकि दान की चोरी में शामिल हर उस व्यक्ति तक पहुंचा जा सके जिसने पवित्र चंदे का गबन किया है।
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