Israel Election 2026 : इजराइल की राजनीति में एक बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। पूर्व सेना प्रमुख और ‘यशर’ पार्टी के प्रमुख गादी आइजनकोट ने आधिकारिक तौर पर अपना चुनावी अभियान शुरू कर दिया है। दिसंबर 2022 से सत्ता पर काबिज प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ आइजनकोट को सबसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है। अपने अभियान के आगाज के दौरान आइजनकोट ने मौजूदा सरकार पर अराजकता और विभाजन फैलाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने वादा किया कि उनका नेतृत्व इजराइल की परंपराओं, विरासत और मूल्यों पर आधारित होगा। उन्होंने ‘इजराइल को जीतना चाहिए’ के नारे के साथ स्पष्ट कर दिया कि आगामी चुनाव देश की एकता और सुरक्षा के लिए निर्णायक साबित होंगे।

‘अक्टूबर की सरकार’ के अंत का संकल्प
7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए भयानक हमले का जिक्र करते हुए आइजनकोट ने कहा कि यह समय ‘उस अक्टूबर वाली सरकार’ को सत्ता से बाहर करने का है। उन्होंने कहा कि इजराइल को अब एक नई दिशा और बेहतर नेतृत्व की आवश्यकता है। आइजनकोट ने नेतन्याहू का नाम लिए बिना उन पर तीखा हमला बोला और कहा कि कुछ नेता अपनी कुर्सी बचाने के लिए समाज को बांट रहे हैं और राष्ट्रीय हितों से समझौता कर रहे हैं। विशेष रूप से, अति-रूढ़िवादी यहूदियों (हारेदी समुदाय) को सैन्य सेवा से छूट देने के विवादित प्रस्तावों पर उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लिया और इसे देश के लिए काम करने वाले नागरिकों के प्रति अपमानजनक बताया।

जवाबदेही और दूरदृष्टि विहीन नेतृत्व पर सवाल
आइजनकोट ने मौजूदा सरकार को ‘झूठ बोलने वाला नेतृत्व’ करार दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के लिए ‘जवाबदेही’ और ‘व्यक्तिगत उदाहरण’ जैसे शब्द बेमानी हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार का शासन चलाने का एकमात्र तरीका नागरिकों के बीच भेदभाव पैदा करना है। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि इस ‘पागलपन’ को खत्म करना हमारा कर्तव्य है, क्योंकि इजराइल के पास बार-बार गलती करने का विशेषाधिकार नहीं है। उन्होंने वादा किया कि यदि वे सत्ता में आते हैं, तो एक ऐसा नेतृत्व प्रदान करेंगे जो दूरदृष्टि और ठोस रणनीति से प्रेरित होगा, न कि सिर्फ विभाजन की राजनीति से।
चुनावी घोषणापत्र: राज्य आयोग और सैन्य सुधार
अपने चुनावी वादों को गिनाते हुए आइजनकोट ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने 7 अक्टूबर के नरसंहार की जांच के लिए एक स्वतंत्र ‘राज्य आयोग’ गठित करने का संकल्प लिया, ताकि भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, उन्होंने उत्तर और दक्षिण इजराइल के पुनर्वास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। सैन्य मोर्चे पर, उन्होंने रिजर्व सैनिकों पर बोझ कम करने के लिए सेवा को 50 दिन तक सीमित करने का वादा किया। साथ ही, उन्होंने एक समावेशी भर्ती नीति का संकेत दिया, जिसमें हरेदी और अरब समुदायों को भी सैन्य और राष्ट्रीय सेवा में शामिल किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी ऐसे गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे, जिसका नेतृत्व वे स्वयं न करें।
नेतन्याहू बनाम आइजनकोट: रणनीतिक टकराव
राजनीति में महज चार साल पहले कदम रखने वाले पूर्व जनरल गादी आइजनकोट आज बेंजामिन नेतन्याहू के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। एक समय नेतन्याहू की युद्ध कैबिनेट का हिस्सा रहे आइजनकोट ने गाजा रणनीति के अभाव में इस्तीफा दे दिया था। जबकि नेतन्याहू का तर्क है कि आइजनकोट की नीतियों से हमास को फायदा होता, वहीं आइजनकोट का स्पष्ट मानना है कि नेतन्याहू का ‘अलग-थलग इजराइल’ का विजन देश के भविष्य के लिए खतरा है। अब इजराइल की जनता को यह तय करना है कि क्या वे नेतन्याहू के अनुभव के साथ चलना चाहते हैं या आइजनकोट के नए और रणनीतिक विजन को चुनते हैं।
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