पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे संगठनात्मक फेरबदल पर फिलहाल रोक लग गई है। इसी बीच Manish Tewari की एक क्रिप्टिक पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे संगठनात्मक फेरबदल पर फिलहाल रोक लग गई है। इसी बीच Manish Tewari की एक क्रिप्टिक पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Punjab Congress : आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों के मद्देनजर चल रही कयासबाजियों पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बुधवार को विराम लगा दिया है। पार्टी आलाकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के अध्यक्ष के रूप में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग अपना कार्यभार संभालते रहेंगे, जबकि प्रताप सिंह बाजवा विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता बने रहेंगे। इस फैसले के साथ ही पार्टी ने संगठनात्मक ढांचे को और मजबूती देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके अलावा, सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमेटी और विजय इंदर सिंघला को चुनाव प्रबंधन समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


कांग्रेस आलाकमान द्वारा नेतृत्व में यथास्थिति बनाए रखने के फैसले के ठीक अगले दिन, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी पोस्ट साझा की है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। तिवारी ने तंज कसते हुए लिखा, ‘है बड़ा कोई अवगुण उसमें, जिसे कोई हुनर आवे।’ साथ ही उन्होंने लोगों और संस्थाओं की असुरक्षाओं के इलाज पर अपनी चिंता व्यक्त की। अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने प्रसिद्ध पंक्ति ‘Que sera, sera, Whatever will be, will be…’ (जो होना है, वह होकर रहेगा) का उपयोग किया, जिसे उनके भविष्य के फैसलों और पार्टी से उनकी कथित नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।

अपनी पोस्ट में मनीष तिवारी ने पार्टी के प्रति अपने लंबे जुड़ाव को भी याद किया। उन्होंने कहा कि पिछले 45 वर्षों में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से बहुत कुछ प्राप्त हुआ है और उन्होंने अपने पूरे वयस्क जीवन को पार्टी की सेवा में समर्पित किया है। हालांकि उन्होंने पार्टी छोड़ने या किसी प्रकार के असंतोष पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उनकी बातों में छिपे भावों ने समर्थकों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। फिलहाल, पार्टी और तिवारी दोनों ही इस विषय पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं।
नेतृत्व में बदलाव न करने के बावजूद, कांग्रेस ने संगठन के विस्तार पर पूरा जोर दिया है। पार्टी ने सुखविंदर सिंह डैनी, राजकुमार वेरका और संगत सिंह गिलजियां को पंजाब कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर एक संतुलित टीम बनाने का प्रयास किया है। इसके साथ ही, वरिष्ठ नेताओं सुखपाल सिंह खैरा, राणा गुरजीत सिंह और धर्मवीर गांधी को चुनाव अभियान समिति का सह-अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, ताकि चुनाव प्रचार को अधिक आक्रामक बनाया जा सके। कांग्रेस का यह कदम राज्य में पार्टी के बिखरे हुए धड़ों को एक साथ लाने और आगामी चुनावी चुनौतियों का एकजुट होकर सामना करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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