E-Rickshaw Security Alert: हाल ही में सामने आई एक चौंकाने वाली घटना ने भारतीय परिवहन क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। कुछ चीनी स्मार्टफोन ऐप्स के जरिए ई-रिक्शा को रिमोट से बंद करने (शटडाउन) की खबरें वायरल होने के बाद सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सूत्रों के मुताबिक, ये ऐप्स न केवल बैटरी मैनेजमेंट के लिए थे, बल्कि इनका दुरुपयोग करके शरारती तत्व राह चलते ई-रिक्शा को बीच रास्ते में ही बंद कर रहे थे। इस सुरक्षा चूक के सामने आने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन खतरनाक ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया है।

किन ऐप्स पर हुई कार्रवाई और सरकार का सख्त निर्देश
सरकार ने जिन प्रमुख ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने का निर्देश दिया है, उनमें ‘BAT-BMS’, ‘Lossigy’ और ‘Epoch-i-ion’ शामिल हैं। सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने एक साइबर सिक्योरिटी समिट के दौरान स्पष्ट किया कि सरकार ऐप स्टोर्स के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि भविष्य में नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी ऐप को आम जनता के लिए उपलब्ध न होने दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह मामला कल ही उनके संज्ञान में आया था और इसे प्राथमिकता के आधार पर हल करते हुए इन ऐप्स को हटा दिया गया है। सरकार अब इस बात पर जोर दे रही है कि किसी भी कनेक्टेड व्हीकल मैनेजमेंट सिस्टम को जारी करने से पहले उसकी सुरक्षा की कड़ी जांच अनिवार्य होगी।

ऐप्स का असली मकसद और दुरुपयोग का बढ़ता जाल
दिलचस्प बात यह है कि ये ऐप्स शुरू से हैकिंग टूल नहीं थे। ‘Shenzhen Grenergy Technology’ द्वारा विकसित ‘BAT-BMS’ को मूल रूप से ब्लूटूथ-इनेबल्ड लिथियम-आयन बैटरी की निगरानी के लिए बनाया गया था। इसका उद्देश्य यूजर्स को बैटरी का वोल्टेज, तापमान और चार्जिंग साइकिल जैसी महत्वपूर्ण जानकारी देना था, ताकि समय पर मेंटेनेंस किया जा सके। हालांकि, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने का फायदा शरारती तत्वों ने उठाना शुरू कर दिया। ये लोग 10 से 15 मीटर की ब्लूटूथ रेंज में आते ही ई-रिक्शा की बैटरी से कनेक्ट हो जाते थे और सवारी के बीच में ही वाहन को बंद कर देते थे, जिससे न केवल ड्राइवरों को आर्थिक नुकसान हो रहा था, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा पर भी बड़ा संकट मंडराने लगा था।
कनेक्टेड व्हीकल्स और साइबर सिक्योरिटी का भविष्य
यह घटना इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि इंटरनेट से जुड़े वाहनों (Connected Vehicles) की सुरक्षा हमारे लिए कितनी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। यदि बैटरी प्रबंधन जैसे छोटे ऐप्स को सुरक्षित नहीं किया गया, तो यह एक बड़ी साइबर त्रासदी का रूप ले सकता है। सरकार की इस त्वरित कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि डिजिटल सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है कि ई-वाहनों में उपयोग होने वाले ऐसे किसी भी सॉफ्टवेयर को कड़ी साइबर सुरक्षा ऑडिट से गुजरना होगा। यात्रियों और चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार अब सख्त मानक और सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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