Dhruv Rathee Video Row: यूट्यूबर ध्रुव राठी द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और धर्मग्रंथों पर आधारित एक विवादास्पद वीडियो को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की शिकायत अपीलीय समिति (GAC) को सख्त निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने समिति से कहा कि वह 15 दिनों के भीतर इस बात पर अंतिम निर्णय ले कि क्या उक्त वीडियो को इंटरनेट से हटाया जाना चाहिए। यह मामला वकील अमिता सचदेवा द्वारा दायर एक अपील से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि राठी का वीडियो न केवल मानहानि करता है, बल्कि धार्मिक भावनाओं को ठेस भी पहुंचाता है। याचिकाकर्ता ने वीडियो के आपत्तिजनक स्वरूप को देखते हुए इसे तत्काल हटाने की मांग की है।

विवाद की जड़: क्या है वीडियो में जिसे बताया जा रहा अपमानजनक?
यह विवाद 21 मार्च को अपलोड किए गए उस वीडियो को लेकर है जिसका शीर्षक ‘Can Hindus eat BEEF? Kerala Story 2 Exposed’ है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, इस वीडियो में ध्रुव राठी ने हिंदू धर्मग्रंथों के हवाले से खान-पान की आदतों और प्राचीन ऋषियों के उल्लेखों पर चर्चा की है। उन्होंने अपने वीडियो में तर्क दिया कि शास्त्रों में भगवान राम और भगवान कृष्ण जैसे देवताओं के मांस खाने की परंपरा का जिक्र मिलता है। याचिकाकर्ता अमिता सचदेवा का तर्क है कि यह वीडियो बेहद अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाला है। उन्होंने इस विषय को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए इसे तत्काल ब्लॉक करने के लिए कानूनी दरवाजा खटखटाया है।

हिंदू भावनाओं का सम्मान और सरकारी पक्ष की सख्त टिप्पणी
दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने बहुत कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ इस प्रकार की अपमानजनक सामग्री को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। ASG ने जोर दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म (इंटरमीडियरी) की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि वे समाज के लिए हानिकारक सामग्री की पहचान करें और उसे तुरंत हटा दें। उन्होंने अदालती मिसालों का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई कंटेंट सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा रहा है, तो मध्यस्थ को बिना देरी किए उसे ब्लॉक करना चाहिए।
गूगल की प्रतिक्रिया और कोर्ट का अंतिम निर्देश
सर्च इंजन Google LLC की ओर से उपस्थित वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि वे अपीलीय समिति के किसी भी आदेश का पालन करने के लिए तैयार हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने याचिका का निपटारा करते हुए GAC को स्पष्ट आदेश दिया। कोर्ट ने कहा, “अपीलीय अथॉरिटी को याचिकाकर्ता की अपील पर 15 दिनों के भीतर त्वरित फैसला लेना होगा।” अदालत ने चेतावनी दी कि यदि इस आदेश की अनदेखी की जाती है, तो इसे बहुत गंभीरता से लिया जाएगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह छूट भी दी है कि यदि उन्हें समिति के निर्णय से असंतोष होता है, तो वे दोबारा कानूनी रास्ता अपना सकती हैं। यह मामला सोशल मीडिया कंटेंट की जवाबदेही और धार्मिक संवेदनशीलता के बीच के संतुलन को लेकर एक बड़ी बहस का केंद्र बना हुआ है।











