Indus Waters Treaty Row: विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty) को लेकर पाकिस्तान द्वारा हाल ही में दी गई भड़काऊ चेतावनियों पर कड़ा रुख अपनाया है। मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर भारत की नीति और स्थिति पहले की तरह ही अडिग और स्पष्ट है। भारत ने पाकिस्तान के इन बयानों को पूरी तरह खारिज करते हुए यह संकेत दिया है कि वह दबाव में आने वाला नहीं है।

विदेश मंत्रालय का पाक को दो-टूक जवाब
साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि सिंधु जल संधि को लेकर भारत का दृष्टिकोण स्थिर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान द्वारा लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के कारण ही वर्तमान में यह संधि प्रभावी ढंग से स्थगित है। भारत ने पाकिस्तान को नसीहत देते हुए कहा कि यदि वह सामान्य स्थिति और सहयोग की बहाली चाहता है, तो उसे सबसे पहले सीमा पार आतंकवाद का समर्थन हमेशा के लिए बंद करना होगा।

पाकिस्तानी नेताओं की गीदड़भभकी और भड़काऊ बयान
विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया तब आई है जब पाकिस्तान के कई नेताओं ने सिंधु जल संधि के बहाने भारत को युद्ध और परिणाम भुगतने की धमकियाँ दी हैं। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसद्दिक मलिक ने अत्यंत भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि भारत सिंधु नदी के पानी को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि यदि भारत ने पानी रोकने की कोशिश की, तो पाकिस्तान उसे गंभीर परिणाम भुगतने पर मजबूर कर देगा। उनके इस बयान ने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियाँ बटोरीं, बल्कि इसे भारत के प्रति पाकिस्तान की नकारात्मक मानसिकता का भी प्रमाण माना जा रहा है।
युद्ध और ‘पानी के हथियार’ का राग
मुसद्दिक मलिक से पूर्व, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद निलंबित सिंधु जल संधि को लेकर युद्ध की चेतावनी दी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, डार ने तर्क दिया था कि यदि भारत सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को उसके हिस्से के पानी से वंचित करने का कोई भी प्रयास करता है, तो इसे ‘पानी का हथियार’ माना जाएगा। उन्होंने दावा किया कि ऐसी कोई भी कोशिश क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए अत्यंत घातक साबित हो सकती है। पाकिस्तान का यह रुख यह दर्शाता है कि वह अपनी नाकामियों का ठीकरा भारत पर फोड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दुष्प्रचार का सहारा ले रहा है।
भारत का संतुलित और स्पष्ट दृष्टिकोण
भारत का स्पष्ट मानना है कि सिंधु जल संधि का भविष्य पाकिस्तान के आचरण पर निर्भर करता है। भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन किया है, लेकिन राष्ट्र की सुरक्षा के साथ समझौता करना उसके लिए संभव नहीं है। पाकिस्तान की धमकियों के बावजूद भारत ने अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है और वह आतंक और बातचीत को एक साथ न चलने देने की अपनी नीति पर पूरी तरह कायम है। भारत द्वारा दी गई यह तीखी प्रतिक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि देश अब अपनी जल संपदा और सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सतर्क और आक्रामक है।
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