Punjab Congress Crisis: पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राज्य कांग्रेस में अंदरूनी कलह और सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आ गया है। पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष बनाने की पुरजोर मांग की है। इन नेताओं का तर्क है कि चन्नी का नेतृत्व जनता के बीच बेहद लोकप्रिय है और आगामी चुनावों में जीत सुनिश्चित करने के लिए उनका अध्यक्ष बनना अनिवार्य है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की यह मांग आलाकमान के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

जनभावना का हवाला दे रहे पार्टी नेता
समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस नेता नजर सिंह मानशाहिया ने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्तिगत असंतोष का विषय नहीं है, बल्कि जनता की इच्छा है। मानशाहिया ने दावा किया कि यदि वर्तमान अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व में पार्टी चुनाव लड़ती है, तो कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी करना बेहद कठिन होगा। पार्टी के कई पूर्व विधायकों और नेताओं का मानना है कि चन्नी को बागडोर सौंपने से चुनावी रणनीति में नई ऊर्जा आएगी और पार्टी बेहतर स्थिति में होगी। यह बयान उस समय सामने आया जब मोरिंडा स्थित चन्नी के आवास पर उनके समर्थकों और कई बड़े नेताओं का जमावड़ा लगा।

नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच चन्नी की नाराजगी
चन्नी के मोरिंडा आवास पर जुटने वाले नेताओं में ओ.पी. सोनी, भारत भूषण आशु, गुरप्रीत सिंह कांगड़ और तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा जैसे कई नाम शामिल थे। इन नेताओं का कहना है कि लोग चन्नी को ही अध्यक्ष के रूप में देखना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष का पद न मिलने से पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। चर्चा है कि नई नियुक्तियों की घोषणा के बाद चन्नी ने पार्टी आलाकमान को धन्यवाद देने के लिए कोई औपचारिक संपर्क भी नहीं किया, जिससे पार्टी के भीतर के मतभेद और भी गहरे होते नजर आ रहे हैं।
चुनाव अभियान समिति में चन्नी को अहम जिम्मेदारी
पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की तमाम अटकलों के बीच, पार्टी आलाकमान ने फिलहाल अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को ही प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का निर्णय लिया है। हालांकि, दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले जालंधर के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी को ‘चुनाव अभियान समिति’ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह पद चुनावी रणनीति, प्रचार प्रसार और जीत की योजना बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कांग्रेस हाईकमान का यह कदम चन्नी के समर्थकों को संतुष्ट करने और उन्हें चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव पंजाब में कांग्रेस के भविष्य के लिए निर्णायक साबित होंगे। एक तरफ जहाँ पार्टी के वरिष्ठ नेता चन्नी के नाम पर लामबंद हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राजा वड़िंग के नेतृत्व में संगठन को एक साथ रखना पार्टी के लिए बड़ी परीक्षा है। इन सब के बीच चन्नी को दी गई चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी क्या पार्टी को जीत दिला पाएगी या यह अंदरूनी खींचतान कांग्रेस की राह मुश्किल करेगी, यह देखना दिलचस्प होगा। पंजाब कांग्रेस फिलहाल एक नाजुक मोड़ पर है जहाँ एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत हो सकती है।
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