Pune Ketan Murder Case: पुणे के बहुचर्चित लोहागढ़ किला मर्डर केस में जांच अब एक अहम मोड़ पर है। व्यवसायी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी के खिलाफ पुलिस ने अपनी जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान, पुलिस ने कोर्ट के समक्ष यह दावा किया कि आरोपी हत्या की साजिश को अंजाम देने के लिए सोशल मीडिया चैट में कोड वर्ड्स और निकनेम का इस्तेमाल कर रहे थे। इस मामले में जांचकर्ताओं ने सिया गोयल के घर से एक पुराना मोबाइल फोन बरामद किया है, जिसमें से डिलीट किए गए डेटा और संदिग्ध संदेशों को निकालने की प्रक्रिया चल रही है।

कोड वर्ड्स और डिलीट चैट से खुला साजिश का राज
सरकारी वकील एडवोकेट राजश्री विरकुड ने कोर्ट में तर्क दिया कि पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने अपने बातचीत में कोड वर्ड्स का सहारा लिया था। जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि केतन का मोबाइल फोन उनके परिवार के लोहागढ़ किले पर पहुंचने से पहले सिया गोयल के पास कैसे आया। सूत्रों के अनुसार, केतन की हत्या के बाद जब उनके रिश्तेदार घटनास्थल पर पहुंचे, तो सिया ने कथित तौर पर वह फोन उन्हें सौंप दिया था। आरोपियों के फोन से रिकवर किए गए डेटा और कोड वाली चैट अब जांच का मुख्य हिस्सा बन गई हैं।

कस्टडी बढ़ाने की मांग और बचाव पक्ष का तर्क
पुलिस ने कोर्ट से आरोपियों की कस्टडी बढ़ाने की मांग की थी। सरकारी वकील एडवोकेट विपुल दुशिंग ने तर्क दिया कि आरोपियों से कस्टडी में गहन पूछताछ बेहद जरूरी है ताकि चैट में इस्तेमाल किए गए कोड और अन्य डिजिटल सबूतों की कड़ियाँ जोड़ी जा सकें। उन्होंने इसे जांच का एक अनिवार्य हिस्सा बताया। दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकीलों ने पुलिस की इस मांग का कड़ा विरोध किया। उन्होंने इसे ‘फिशिंग इंक्वायरी’ करार देते हुए कहा कि 12 दिन की लंबी कस्टडी के बाद बिना किसी ठोस आधार के और रिमांड मांगना अनुचित है। बचाव पक्ष ने संविधान के अनुच्छेद 20 का हवाला देते हुए कहा कि आरोपियों को खुद के खिलाफ साक्ष्य देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
कोर्ट का फैसला: आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत
दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद, जेएमएफसी ए.एम. विभूते की अदालत ने पुलिस की कस्टडी बढ़ाने की अर्जी पर सुनवाई पूरी की। कोर्ट ने साक्ष्यों और जांच की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करते हुए आरोपियों सिया गोयल और चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इस आदेश के साथ ही अब मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में प्रवेश कर गया है। जांच टीम का मानना है कि न्यायिक हिरासत के दौरान भी वे साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर मामले की अन्य कड़ियों को जोड़ने में सफल होंगे।
क्या है हत्या का मुख्य मकसद?
लोहागढ़ किले पर हुई इस घटना ने पूरे पुणे को झकझोर कर रख दिया है। केतन अग्रवाल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद से सिया गोयल और चेतन चौधरी मुख्य संदिग्धों के रूप में उभरे हैं। पुलिस फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह हत्या किसी पुरानी रंजिश का नतीजा है या इसके पीछे कोई बड़ा आर्थिक मकसद छिपा है। बरामद मोबाइल फोन से मिलने वाला डेटा इस केस में सबसे महत्वपूर्ण ‘क्लू’ साबित हो सकता है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों के कोड वर्ड्स के पीछे छिपे असली चेहरे और उनके इरादे जल्द ही पूरी तरह से साफ हो जाएंगे।
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