Bastar Fertilizer Row: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में इन दिनों नकली डीएपी (DAP) खाद के मुद्दे ने किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। धान रोपाई के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त सीजन के दौरान जगदलपुर के समीप कुम्हरावंड स्थित एक निजी कृषि केंद्र से खरीदी गई खाद को लेकर उपजे विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है। किसानों ने खाद की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए उसे ‘मिट्टी’ करार दिया है। इस घटना से आक्रोशित होकर किसानों ने जिला कलेक्टर के पास पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। फिलहाल, कई किसानों ने एहतियात के तौर पर अपने खेतों में खाद डालने का कार्य रोक दिया है, जबकि जो किसान पहले ही इसका उपयोग कर चुके हैं, वे अपनी फसल को लेकर भारी चिंता में डूबे हुए हैं।

किसानों का आरोप: खाद नहीं, मिट्टी बेच रहे कृषि केंद्र
प्रभावित किसान पुरन कश्यप ने बताया कि उन्होंने धरमपुरा स्थित एक निजी कृषि केंद्र से 2,000 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से डीएपी खाद खरीदी थी। जब उन्होंने खेत में खाद डालने की प्रक्रिया शुरू की, तो खाद की गुणवत्ता देखकर उनके होश उड़ गए। खाद का दाना हाथ से रगड़ते ही मिट्टी की तरह बिखर रहा था। किसानों का यह भी गंभीर आरोप है कि निजी कृषि केंद्र संचालक न केवल निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर खाद बेच रहे हैं, बल्कि किसी भी प्रकार का पक्का बिल भी नहीं दे रहे हैं। पुरन कश्यप का कहना है कि महंगे दाम पर खाद खरीदने के बावजूद यदि किसान को नकली माल मिलता है, तो उनकी मेहनत और पूरी खरीफ फसल बर्बाद होना निश्चित है।

प्रशासन की सख्ती: जांच टीम का हुआ गठन
किसानों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त कलेक्टर ए. आर. राणा ने तुरंत जांच के आदेश जारी किए हैं। मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग और एसडीएम की एक संयुक्त टीम गठित की गई है। यह टीम संबंधित कृषि केंद्र का तत्काल निरीक्षण करेगी, खाद के नमूने (सैंपल) एकत्रित कर उन्हें लैब भेजेगी और दुकान के रिकॉर्ड व बिलों की बारीकी से जांच करेगी। संयुक्त कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच रिपोर्ट में नकली खाद या किसी भी प्रकार की अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित दुकानदार के खिलाफ नियमानुसार कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फसल पर गंभीर प्रभाव का डर
धान की रोपाई के इस अहम दौर में नकली खाद का मिलना केवल एक आर्थिक धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के किसानों के भविष्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि डीएपी के स्थान पर नकली या मिट्टी जैसी खाद का उपयोग करने से पौधों का विकास रुक सकता है, जिससे पैदावार में भारी गिरावट आने की संभावना है। बस्तर के किसान अब प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि दोषी दुकानदारों पर सख्त नजीर पेश की जाएगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार की धांधली न हो और किसानों की मेहनत सुरक्षित रहे। पूरा कृषि विभाग अब लैब रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही इस खाद के असल स्वरूप का पता चल पाएगा।











