Modi Cabinet reshuffle : क्या 22 साल बाद देश को मिलेगा नया उप प्रधानमंत्री? दो नामों को लेकर अटकलें तेज

Modi Cabinet reshuffle : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण होने के साथ ही दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) में फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। भाजपा की स्थापित परंपरा रही है कि सरकार के दो वर्ष पूरे होने के बाद संगठन और सरकार में आवश्यक बदलाव किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, नितिन नवीन के भाजपा अध्यक्ष पद संभालने के पांच महीने बाद भी अभी तक उनकी नई ‘टीम’ का गठन नहीं हुआ है। इन संकेतों से यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में केंद्रीय कैबिनेट और पार्टी संगठन, दोनों में बड़े स्तर पर पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू होना निश्चित है।

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कैबिनेट में बदलाव और संगठन का तालमेल

सूत्रों के अनुसार, इस बार का फेरबदल पूरी तरह से ‘कोऑर्डिनेटेड’ होगा, जिसमें कैबिनेट और संगठन के बीच सामंजस्य बैठाया जाएगा। योजना के तहत कैबिनेट के कुछ अनुभवी चेहरों को पार्टी संगठन की कमान सौंपी जा सकती है, जबकि कुछ नए और ऊर्जावान चेहरों को कैबिनेट में शामिल करके सरकार को नया रूप दिया जाएगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि लगभग 7-8 नए सांसदों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है, जबकि कई मौजूदा मंत्रियों पर ‘परफॉरमेंस’ के आधार पर बाहर होने का खतरा भी मंडरा रहा है। मोदी-शाह की जोड़ी द्वारा पावर-बैलेंस बनाए रखने की इस कवायद को राजनीतिक विश्लेषक काफी बारीकी से देख रहे हैं।

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डिप्टी प्राइम मिनिस्टर पद की प्रतीकात्मक वापसी की अटकलें

वर्तमान में सबसे अधिक चर्चा एक पद को लेकर है, जिसे संवैधानिक रूप से अधिक प्रतीकात्मक माना जाता है—उप प्रधानमंत्री (डिप्टी प्राइम मिनिस्टर) का पद। भारत के राजनीतिक इतिहास में अब तक कुल 7 नेता इस पद पर आसीन रहे हैं। लालकृष्ण आडवाणी अंतिम नेता थे, जो 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में उप प्रधानमंत्री रहे। आडवाणी का प्रभाव उस समय वाजपेयी सरकार में इतना अधिक था कि उन्हें यह पद उनके कद के सम्मान में दिया गया था। मनमोहन सिंह के 10 वर्षों के शासन और मोदी के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में यह पद रिक्त रहा है। अब पुनः इस पद के सृजन की चर्चा से राजनीतिक पारा गरमा गया है।

रेस में किसके नाम सबसे आगे?

डिप्टी प्राइम मिनिस्टर के पद के लिए मुख्य रूप से दो नामों पर अटकलें लगाई जा रही हैं। पहला नाम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का है, जिनका भाजपा और कैबिनेट में दबदबा सर्वविदित है। बंगाल चुनावों में उनकी सक्रिय भूमिका और सफलता के बाद माना जा रहा है कि उन्हें इस पद के माध्यम से पार्टी में और अधिक शक्तिशाली बनाया जा सकता है। दूसरा संभावित नाम बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का है।

वर्तमान में वे राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन उन्हें अभी तक केंद्र में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली है। जेडीयू खेमे से लगातार मांग उठती रही है कि नीतीश कुमार को इस पद के योग्य माना जाए। हालांकि, भाजपा या सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह अटकलें इस बात का प्रमाण हैं कि गठबंधन की राजनीति में संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार नए प्रयोग कर सकती है।

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Chandan Das

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