Ram Mandir Donation Case : राम मंदिर चंदा विवाद पर महामंडलेश्वर का बड़ा दावा, चंपत राय पर गंभीर आरोप लगाए

Ram Mandir Donation Case : अयोध्या में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण के साथ ही अब चंदे की राशि में कथित हेराफेरी का विवाद गहराता जा रहा है। यह मुद्दा अब केवल जांच एजेंसियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संत समाज के बीच भी एक बड़ा वैचारिक और राजनीतिक टकराव बन गया है। हाल ही में महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ बेहद सनसनीखेज और गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उनके द्वारा लगाए गए इन आरोपों ने अयोध्या से लेकर लखनऊ तक की सियासत और धार्मिक जगत में हड़कंप मचा दिया है।

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चंपत राय की साख पर संतों का बड़ा हमला

महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने कड़े लहजे में कहा है कि चंपत राय की विश्वसनीयता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और अब उनकी प्रतिष्ठा का पुनर्निर्माण संभव नहीं है। महाराज का दावा है कि राम मंदिर ट्रस्ट के धन में हो रही यह धांधली कोई हालिया घटना नहीं है, बल्कि यह खेल प्रयागराज कुंभ के समय से ही सुनियोजित तरीके से चल रहा था। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि ट्रस्ट के फंड में हुई हर एक अनियमितता और चोरी चंपत राय की जानकारी में और उनकी सीधी देखरेख में हुई है। संत के इस बयान ने मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कई गहरे प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

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राजनीतिक गलियारों में वायरल हुआ ‘लीक’ का एंगल

इस विवाद में एक नया राजनीतिक मोड़ तब आया जब महामंडलेश्वर ने दावा किया कि इस कथित चोरी की गोपनीय जानकारी समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव तक कैसे पहुंची। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘टिन्नू यादव’ नामक एक व्यक्ति ने अखिलेश यादव को फोन करके ट्रस्ट के भीतर चल रही वित्तीय गड़बड़ियों की सूचना दी थी। इस खुलासे के बाद राम मंदिर विवाद अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है। महामंडलेश्वर ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा है कि इस मामले को अब दबाना नामुमकिन है और इसे छिपाने की हर कोशिश नाकाम होगी।

ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों पर भी गाज

महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने केवल चंपत राय को ही नहीं, बल्कि इस कथित घपले में शामिल अन्य नामों पर भी निशाना साधा है। उन्होंने ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा, गोपाल राव और ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष (ट्रेजरर) का नाम लेते हुए कहा कि जो कोई भी इस वित्तीय अनियमितता का हिस्सा है, उसे अपने कर्मों का फल भुगतना होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन सभी को कानून के दायरे में आकर जेल की सलाखों के पीछे जाना ही पड़ेगा।

इस बयान के बाद अब राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन, ऑडिटिंग और पारदर्शी कामकाज को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यह घटनाक्रम न केवल ट्रस्ट के सामने एक बड़ी चुनौती है, बल्कि उन करोड़ों राम भक्तों की आस्था के लिए भी एक परीक्षा है जिन्होंने मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धापूर्वक अपना योगदान दिया है। अब देखना यह होगा कि ट्रस्ट इस गंभीर आरोप का क्या जवाब देता है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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Chandan Das

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