Parliament Session : 20 जुलाई से शुरू होगा संसद का मानसून सत्र, कई मुद्दों पर हंगामे के आसार

20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसकी जानकारी देते हुए तारीखों का ऐलान किया। हालांकि सत्र शुरू होने से पहले ही कई राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं। आखिर किन विषयों पर सदन में हंगामे के आसार हैं, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Parliament Session : संसद का आगामी मानसून सत्र 20 जुलाई, 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त, 2026 तक संचालित होगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को इस आशय की आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों को इस अवधि के लिए बुलाने की मंजूरी प्रदान कर दी है। रिजिजू ने अपने पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि सत्र के दौरान राष्ट्रीय महत्व के ज्वलंत मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा और विधायी निर्णय लिए जाने की पूरी संभावना है।

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राजनीतिक बदलावों और नई चुनौतियों के बीच सत्र का आगाज

यह मानसून सत्र देश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों की जीत के बाद यह पहला सत्र होगा। विशेष रूप से, पश्चिम बंगाल में भाजपा की अभूतपूर्व जीत ने राजनीतिक समीकरणों को नया रूप दिया है। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के भीतर हुई बगावत का असर भी सदन की कार्यवाही में स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि स्पीकर ओम बिरला के समक्ष टीएमसी के 20 और शिवसेना (उबाठा) के 6 सांसदों द्वारा अलग गुट के रूप में मान्यता मांगने का मामला लंबित है, जिस पर सत्र शुरू होने से पूर्व निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।

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सत्तापक्ष का बढ़ता संख्या बल और आगामी रणनीति

राज्यसभा में नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के उपरांत एनडीए (सत्तापक्ष) का संख्या बल पहले की तुलना में और अधिक मजबूत हो गया है। पिछला सत्र सरकार के लिए कुछ मामलों में चुनौतीपूर्ण रहा था, विशेषकर महिला आरक्षण विधेयक और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक के पारित न होने के कारण। सरकार अब इन विधेयकों को नई रणनीति के साथ पेश करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, सरकार संविधान संशोधन विधेयक का मसौदा फिर से तैयार कर रही है। इसमें सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत वृद्धि किए जाने का प्रस्ताव विचाराधीन है, ताकि जनसंख्या आधारित सीटों की वृद्धि पर दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को भी संबोधित किया जा सके।

विधायी कार्यों की प्राथमिकताएं और संसदीय मर्यादा

आगामी मानसून सत्र के दौरान सरकार का मुख्य ध्यान प्रमुख विधेयकों को पारित कराने पर रहेगा। सदन में विपक्ष का भी पूरा जोर अपनी मांगों को मजबूती से रखने पर होगा। यह सत्र न केवल विधायी दृष्टिकोण से, बल्कि देश की जनसांख्यिकी और प्रतिनिधित्व के बदलते स्वरूप को देखते हुए भी ऐतिहासिक साबित हो सकता है। संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार सदन में सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, बशर्ते कार्यवाही सुचारू रूप से चले। देखना यह होगा कि क्या सरकार अपने महत्वाकांक्षी विधायी एजेंडे को इस बार संसद की दोनों सदनों में पारित कराने में सफल हो पाती है या नहीं। यह सत्र संसदीय लोकतंत्र की मजबूती और राजनीतिक सहमति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की भी परीक्षा लेगा।

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