Maharashtra Politics : केंद्र सरकार द्वारा आगामी मॉनसून सत्र की तारीखों के ऐलान के साथ ही देश की राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। यह सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक प्रस्तावित है। इस घोषणा के बाद से ही दिल्ली और महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या सत्र शुरू होने से पहले मोदी मंत्रिमंडल में कोई बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा? हालांकि, मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाएं अब कम नजर आ रही हैं, लेकिन इन सबके बीच महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार के अगले कदम को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। क्या शरद पवार अपनी पसंदीदा शर्तों के साथ एनडीए (NDA) का हिस्सा बनेंगे, यह सवाल इस समय सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बना हुआ है।

शरद पवार की चिंता और एनसीपी (एसपी) का भविष्य
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की कमजोर होती स्थिति और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ हुए घटनाक्रमों ने शरद पवार को गंभीर रूप से चिंतित कर दिया है। अपनी पार्टी, एनसीपी (शरदचंद्र पवार), के भविष्य को सुरक्षित करने और सुप्रिया सुले समेत अपने विश्वस्त नेताओं के लिए एक मजबूत राजनीतिक डील करने की दिशा में वे विचार कर रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि यदि समय रहते कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो पार्टी में टूट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। एक ओर जहां बीजेपी के पास देने के लिए कई राजनीतिक अवसर हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के हाथ फिलहाल बंधे हुए नजर आते हैं।

कृषि और सहकारिता मंत्रालय पर पवार की नजर
चर्चाएं यह भी हैं कि शरद पवार मोदी मंत्रिमंडल में अपनी बेटी सुप्रिया सुले के लिए ‘कृषि मंत्रालय’ की मांग रख रहे हैं। यह मंत्रालय फिलहाल शिवराज सिंह चौहान के पास है। इसके अलावा, शरद पवार का दूसरा पसंदीदा मंत्रालय ‘सहकारिता’ है, जिसका प्रभार गृहमंत्री अमित शाह संभालते हैं। पवार के करीबियों का कहना है कि वे सहकारिता मंत्रालय में अपने किसी सांसद को राज्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। चूँकि शरद पवार स्वयं 2004 से 2014 तक केंद्रीय कृषि मंत्री रह चुके हैं, इसलिए इस क्षेत्र में उनका अनुभव और प्रभाव आज भी बरकरार है। यदि बीजेपी के साथ कोई डील होती है, तो महाराष्ट्र की राजनीति में उनके पोते रोहित पवार के मंत्री बनने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं।
सुप्रिया सुले: कृषि मंत्री के रूप में एक नया कीर्तिमान?
यदि सुप्रिया सुले कृषि मंत्री के रूप में नियुक्त होती हैं, तो यह भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान होगा। अब तक देश में किसी भी महिला ने स्वतंत्र रूप से केंद्रीय कृषि मंत्रालय का प्रभार नहीं संभाला है। हालांकि, शोभा करंदलाजे और कृष्णा तीरथ जैसे नाम राज्यमंत्री के रूप में इस विभाग में कार्य कर चुके हैं। फिलहाल, शरद पवार के पास आठ सांसद और नौ विधायक हैं, और वे स्वयं राज्यसभा के सदस्य हैं। सुप्रिया सुले की स्वच्छ छवि और उनकी संसदीय कार्यक्षमता उन्हें एक सशक्त दावेदार बनाती है। अब देखना यह है कि बीजेपी शरद पवार की इन शर्तों पर क्या रुख अपनाती है और आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में किस प्रकार के समीकरण बनते हैं।











