Ram Mandir Donation Row : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दानपात्र से कथित चोरी के मामले ने देशभर के रामभक्तों को स्तब्ध कर दिया है। इस गंभीर विवाद पर पहली बार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। रविवार को एक भावुक ‘ओपन लेटर’ के माध्यम से उन्होंने कहा कि पांच सदियों के अथक संघर्ष और अनगिनत बलिदानों के बाद निर्मित भव्य मंदिर में ऐसी घटना का होना अत्यंत दुखद और शर्मनाक है। उन्होंने स्वीकार किया कि दान के पैसों में हेराफेरी की खबरों ने न केवल उन्हें व्यक्तिगत रूप से आहत किया है, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था पर भी एक गहरी चोट है।

“निजी खर्च के लिए कभी नहीं लिया एक भी रुपया”
अपने पत्र में गोविंद देव गिरी महाराज ने अपनी पारदर्शिता और निष्ठा को स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने ट्रस्ट में किसी पद के लिए कभी कोई आकांक्षा नहीं रखी। उन्होंने इसे प्रभु श्रीराम की सेवा का सौभाग्य बताया। महाराज ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ट्रस्ट से अपने किसी भी निजी खर्च या प्रवास के लिए आज तक एक भी रुपया नहीं लिया है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि मंदिर का प्रबंधन पूरी तरह से व्यवस्थित है। ट्रस्ट की आय और व्यय का नियमित रूप से ऑडिट किया जाता है और पुणे से उनके सहयोगी चार्टर्ड अकाउंटेंट हर महीने अयोध्या आकर खातों की गहन जांच करते हैं, ताकि हर पाई का हिसाब सुरक्षित रहे।


बैंकिंग व्यवस्था और दान की गणना पर महत्वपूर्ण सफाई
कोषाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मंदिर के वित्तीय लेनदेन के लिए पूरी तरह से आधुनिक और सुरक्षित बैंकिंग प्रणाली अपनाई गई है। उन्होंने बताया कि वे स्वयं बैंक खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं और न ही उनके पास कोई चेकबुक है। सभी भुगतान सीधे बैंक ट्रांसफर के माध्यम से किए जाते हैं, जिससे नकद भुगतान की किसी भी गुंजाइश को खत्म कर दिया गया है। दानपात्र की राशि की गणना को लेकर उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया शुरुआत से ही स्थानीय ट्रस्टी देखते रहे हैं। दान की गणना के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के साथ मिलकर एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की गई है, जिससे प्रबंधन में स्पष्टता बनी रहे।
निष्पक्ष जांच का संकल्प और दोषियों को कठोर दंड
गोविंद देव गिरी महाराज ने जोर देकर कहा कि इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने पुलिस, एसआईटी और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताते हुए स्पष्ट किया कि जो भी इस अपराध में शामिल पाया जाए, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। हम मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के भक्त हैं और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

पारदर्शिता का नया अध्याय और भविष्य की कार्ययोजना
पत्र के अंत में महाराज ने ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों से भविष्य में और अधिक पारदर्शी एवं अभेद व्यवस्था लागू करने का आह्वान किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों की मदद से एक ऐसी प्रणाली विकसित की जाए, जिससे दानपात्र की राशि की निगरानी हर पल हो सके। उन्होंने विश्वास जताया कि जांच के बाद सारा सच सामने आएगा और राम मंदिर प्रबंधन देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए पारदर्शिता का एक आदर्श उदाहरण बनकर उभरेगा। रामभक्तों की पाई-पाई की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही ट्रस्ट की सर्वोच्च प्राथमिकता है।











