Surajpur News : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ ग्राम लांची में स्थित एक अवैध पत्थर खदान में काम करने वाले दो 18 वर्षीय युवकों की जान चली गई। रविवार की दोपहर करीब 12 बजे बाबूलाल गोंड़ और जयपाल गोंड़, जो खदान में मजदूरी कर रहे थे, अचानक हुए भू-धंसाव की चपेट में आ गए। पत्थर निकालने के दौरान खदान का एक विशाल बोल्डर और मिट्टी का मलबा सीधे उनके ऊपर आ गिरा। इस भयावह हादसे में दोनों युवक मलबे के नीचे बुरी तरह दब गए और घटनास्थल पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी असमय मृत्यु से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

मना करने के बावजूद जोखिम में डाली जान
घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों युवकों को खदान के अंदर न जाने की चेतावनी दी गई थी। स्थानीय लोगों ने उन्हें खतरनाक स्थिति के बारे में आगाह भी किया था, लेकिन युवकों ने यह कहकर उन्हें आश्वस्त किया कि वे बस अभी वापस आ रहे हैं। नियति को कुछ और ही मंजूर था; उनके अंदर जाते ही खदान का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया। तेज आवाज सुनकर जब ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़े, तो वहां का मंजर देखकर उनकी रूह कांप गई। ग्रामीणों ने फौरन राहत कार्य शुरू किया और मलबे को हटाकर दोनों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और वे दोनों इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे।

पुलिस और प्रशासन की टीम ने लिया जायजा
हादसे की सूचना मिलते ही सूरजपुर पुलिस और तहसीलदार सूर्यकांत साय की टीम तत्काल प्रभाव से मौके पर पहुंची। प्रशासन ने कड़ी मशक्कत के बाद मलबे से शवों को बाहर निकलवाया और उन्हें पोस्टमार्टम के लिए नजदीकी अस्पताल भेज दिया। पोस्टमार्टम की औपचारिकताओं के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। दो जवान बेटों की एक साथ अर्थी उठते देख पूरे लांची गांव में मातम का सन्नाटा पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे इस दुख की घड़ी में पूरी तरह टूट चुके हैं। प्रशासन ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन इस घटना ने परिवारों की खुशियां छीन ली हैं।
अवैध खनन पर उठे गंभीर सवाल: कौन है जिम्मेदार?
इस दर्दनाक हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ग्राम लांची में यह अवैध पत्थर खदान किसकी शह पर संचालित हो रही थी? प्रशासन के नाक के नीचे इतने लंबे समय से चल रहे इस अवैध कारोबार ने दो युवाओं की जान ले ली है। घटना के बाद प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। सूरजपुर तहसीलदार सूर्यकांत साय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस खदान का मालिक कौन है और यह काम किसके संरक्षण में कराया जा रहा था। जांच के बाद दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या कार्रवाई उन युवकों की जान वापस ला सकेगी, जिन्होंने सिस्टम की लापरवाही के कारण अपनी जान गंवाई?
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