PM Modi Indonesia Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन दिवसीय महत्वपूर्ण इंडोनेशिया यात्रा के लिए सोमवार, 6 जुलाई 2026 को रवाना होंगे। यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक है; यह प्रधानमंत्री की इस देश की चौथी यात्रा है और मई 2018 में भारत-इंडोनेशिया संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा मिलने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। प्रधानमंत्री यह यात्रा इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के विशेष निमंत्रण पर कर रहे हैं। जकार्ता में प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ गहन द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की जाएगी और भविष्य के सहयोग की रूपरेखा तैयार की जाएगी। साथ ही, वे वहां रह रहे भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे।

प्रम्बानन मंदिर: भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक धरोहर
इस यात्रा का एक मुख्य आकर्षण योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ‘प्रम्बानन मंदिर परिसर’ का दौरा होगा। राज्यसभा सांसद और पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने इस स्थल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मंदिर भारत और इंडोनेशिया के बीच गहरे सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों का एक प्रमुख प्रतीक है। प्रधानमंत्री का इस परिसर के दौरे का एक उद्देश्य यह भी है कि क्या भारत इस ऐतिहासिक स्मारक के जीर्णोद्धार में कोई सक्रिय योगदान दे सकता है। यह स्मारक उस स्वर्णिम युग की याद दिलाता है जब दोनों देशों के बीच समुद्री और सांस्कृतिक व्यापारिक मार्ग अत्यंत सक्रिय थे। प्रम्बानन मंदिर न केवल वास्तुकला का चमत्कार है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच प्राचीन काल से चले आ रहे मानवीय और आध्यात्मिक जुड़ाव का भी जीवंत प्रमाण है।

सभ्यतागत जुड़ाव और साझा विरासत का प्रतीक
पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने एएनआई के साथ चर्चा में बताया कि भारत और इंडोनेशिया के बीच रिश्ते इतिहास के पन्नों से कहीं ज्यादा गहरे हैं। उन्होंने जकार्ता के केंद्र में स्थित कृष्ण-अर्जुन के रथ की विशाल प्रतिमा का उदाहरण देते हुए कहा कि ये प्रतीक हमारे बीच मौजूद प्राचीन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक साम्य को दर्शाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का एक प्रमुख लक्ष्य इसी ऐतिहासिक संबंधों की नींव को आज के आधुनिक दौर में आपसी आर्थिक और रणनीतिक सहयोग में बदलना है। इस पहल के माध्यम से भारत अपने उस गौरवशाली इतिहास को आधुनिक सहयोग के ढांचे में पिरोने का प्रयास कर रहा है, जिससे दोनों राष्ट्रों को समकालीन वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में लाभ मिल सके।
दशकों पुराना रिश्ता और बीजू पटनायक का योगदान
भारत और इंडोनेशिया के कूटनीतिक संबंधों की जड़ें काफी गहरी और पुरानी हैं। इसकी एक झलक 1950 में तब दिखी थी जब इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि बनकर आए थे। साझा विरासत का एक और बड़ा उदाहरण दुनिया में मौजूद हिंदू देवताओं की विशाल प्रतिमाएं हैं, जो इंडोनेशिया की संस्कृति में रची-बसी हैं। इसके अलावा, ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी बीजू पटनायक का इंडोनेशिया के स्वतंत्रता संग्राम में दिया गया योगदान दोनों देशों की दोस्ती का अटूट स्तंभ है। उनकी बहादुरी के लिए उन्हें इंडोनेशिया की मानद नागरिकता और सर्वोच्च सम्मान ‘भूमि पुत्र’ से नवाजा गया था, जो भारत-इंडोनेशिया के आपसी प्रेम और भरोसे की एक अनूठी गाथा है।
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