Illegal Coal Mining : नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने अवैध कोयला खनन और चोरी की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में केंद्रीय गृह सचिव, कोयला सचिव, सीआईएसएफ, कोल इंडिया लिमिटेड और बीसीसीएल के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य देश के कोयला क्षेत्रों, विशेषकर धनबाद और आसपास के इलाकों में बढ़ रही अवैध गतिविधियों को जड़ से समाप्त करने के लिए रणनीतिक खाका तैयार करना था।

पिछले प्रयासों और उठाए गए कदमों की समीक्षा
बैठक के दौरान कोयला मंत्रालय ने बताया कि अक्टूबर 2025 में हुई पिछली समीक्षा के बाद से कई कड़े कदम उठाए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957’ के तहत सीआईएसएफ और कोल इंडिया के अधिकारियों को व्यापक अधिकार दिए गए हैं। इसके तहत वे अब न केवल केस दर्ज कर सकते हैं, बल्कि संदिग्ध ठिकानों की तलाशी, जब्ती और अवैध रूप से निकाले गए खनिजों के साथ-साथ उपकरणों और वाहनों को जब्त करने के लिए अधिकृत हैं। इसके अलावा, दिसंबर 2025 में हुई बैठक के निर्णयों के अनुरूप ‘कोयला क्षेत्र समन्वय समिति’ का गठन भी किया जा चुका है।

‘जीरो कोल लीकेज प्लान’ और सख्ती के निर्देश
अमित शाह ने अब तक किए गए प्रयासों की सराहना तो की, लेकिन उन्होंने साफ किया कि अवैध खनन पूरी तरह खत्म होने तक संतोष नहीं किया जा सकता। उन्होंने ‘जीरो कोल लीकेज प्लान’ को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया। गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि अधिकारियों को सौंपे गए कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल आपसी तालमेल और निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा और वैध खनन कार्यों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है।
ई-वे बिल और जीएसटी अधिकारियों की भूमिका
अवैध कोयले के परिवहन को रोकने के लिए अमित शाह ने एक बड़ा निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कानूनी कोयले का ही उपयोग हो, इसके लिए जीएसटी अधिकारियों को भी इस निगरानी प्रक्रिया में शामिल किया जाए। अब कोयले के हर परिवहन के लिए ई-वे बिल की गहन जांच अनिवार्य होगी, जिससे अवैध कोयले को बाजार तक पहुँचने से रोका जा सके। गृह मंत्री ने कोयला मंत्रालय को इस पूरी प्रक्रिया की नियमित समीक्षा करने के भी कड़े निर्देश दिए हैं।
सुरक्षा के लिए तकनीक और ‘क्विक रिस्पॉन्स’ का इस्तेमाल
सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए गृह मंत्री ने सीआईएसएफ की तैनाती को प्राथमिकता सूची में रखने का आदेश दिया। संवेदनशील इलाकों में तुरंत कार्रवाई के लिए ‘क्विक रिस्पॉन्स टीमें’ बनाने और बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर देते हुए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स के हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों के माध्यम से अवैध खनन गतिविधियों और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने को कहा गया है। यह आधुनिक तकनीक अवैध खनन के खिलाफ एक निर्णायक हथियार साबित होगी।
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