One Nation One Election: देश में बार-बार होने वाले चुनावों के चक्र को समाप्त करने और ‘एक देश, एक चुनाव’ (One Nation, One Election) के महत्वाकांक्षी चुनावी सुधार को धरातल पर उतारने के लिए गठित संसद की संयुक्त समिति ने अपनी कार्यप्रणाली में तेजी ला दी है। समिति के अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता पी.पी. चौधरी ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि समिति एक ऐसी प्रभावी और सर्वमान्य रूपरेखा तैयार करने में जुटी है, जिससे इस ऐतिहासिक सुधार को वर्ष 2029 के आम चुनाव तक पूरे भारत में सफलतापूर्वक लागू किया जा सके। गोवा में आयोजित समिति की दो दिवसीय बैठक के दौरान उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देशहित में इस बदलाव को लाना समय की मांग है।

99 प्रतिशत हितधारकों ने प्रस्ताव का किया समर्थन
राजस्थान के पाली से सांसद और समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने दावा किया कि अब तक देश के विभिन्न राज्यों में जिन नागरिक संस्थाओं और हितधारकों से परामर्श किया गया है, उनमें से लगभग 99 प्रतिशत ने इस दूरगामी प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन किया है। गोवा में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जनता इस बात को समझ रही है कि एक साथ चुनाव होने से न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि देश की विकास गति में भी तेजी आएगी। समिति का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राजनीतिक दलों और राज्यों के साथ व्यापक चर्चा कर एक ऐसी व्यवस्था बनाना है जो सर्वस्वीकार्य हो।

बार-बार चुनावों से सात लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान
पी.पी. चौधरी ने इस सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए इसके आर्थिक और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बार-बार अलग-अलग समय पर होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों के कारण देश को लगभग सात लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। बार-बार चुनाव होने से देश के किसी न किसी हिस्से में आदर्श आचार संहिता (MCC) लागू रहती है, जिससे सरकारी मशीनरी चुनावी ड्यूटी में व्यस्त हो जाती है। इसका सीधा असर आम जनता से जुड़े विकास कार्यों और जनहित की नीतियों पर पड़ता है, जो लंबे समय तक ठप रहती हैं। एक साथ चुनाव होने से इस संसाधन की बर्बादी को रोका जा सकेगा।
राज्यों के साथ समन्वय और प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान
संसदीय समिति ने गोवा में संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 पर चर्चा शुरू की है। इसकी शुरुआत गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ हुई उच्च स्तरीय बातचीत से हुई। बैठक में इस बात पर विचार-विमर्श किया गया कि यदि लोकसभा और सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाते हैं, तो राज्यों के सामने किस प्रकार की प्रशासनिक, संवैधानिक और व्यावहारिक चुनौतियां आ सकती हैं। पी.पी. चौधरी का कहना है कि वे एक ऐसा संतुलन और तंत्र विकसित करना चाहते हैं जिसे सभी राजनीतिक दल स्वेच्छा से अपना सकें।
2029 से पहले भी संभव है बदलाव
समिति अब तक गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली सहित कई राज्यों का दौरा कर चुकी है और विशेषज्ञों, शिक्षाविदों व कानूनी जानकारों से सीधा संवाद कर चुकी है। 2029 की समय-सीमा के बारे में पूछे जाने पर चौधरी ने संकेत दिया कि यदि कुछ राज्यों के राजनीतिक दल स्वेच्छा से अपनी चुनावी प्रक्रिया के कार्यकाल को लोकसभा के साथ मिलाने पर सहमत होते हैं, तो यह व्यवस्था 2029 से पहले भी कुछ राज्यों में लागू की जा सकती है। समिति फिलहाल सभी दलों के बीच आम सहमति बनाने के लिए पूरी निष्ठा से प्रयासरत है।
Read More : Pakistan Cargo Plane Crash: रडार से गायब विमान का मिला मलबा, क्रू का अब तक नहीं चला पता












