Bastar News : छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा किए जा रहे दावों पर कांग्रेस ने एक बार फिर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा सरकार की नीतियों और बस्तर क्षेत्र के विकास को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शुक्ला ने याद दिलाया कि 31 मार्च को भाजपा सरकार ने आधिकारिक रूप से नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा की थी। अब जबकि उस घोषणा के बाद से सरकार के 100 दिन पूरे होने वाले हैं, कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार बस्तर के विकास के लिए जनता से किए गए वादों का श्वेत पत्र जारी करे और बताए कि पिछले 100 दिनों में जमीनी स्तर पर क्या कार्य किए गए हैं।

बस्तर विकास के वादों की जमीनी हकीकत पर सवाल
सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो और बड़ी-बड़ी उपलब्धियों का गुणगान कर रही हो, लेकिन बस्तर की वास्तविक स्थिति दावों के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सलवाद मुक्त क्षेत्र घोषित करने के बाद बस्तर के सर्वांगीण विकास के जो बड़े-बड़े वादे किए गए थे, उनका क्रियान्वयन कहीं भी नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस ने पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस दौरान सुरक्षा कैंपों की स्थापना के माध्यम से स्थानीय लोगों का भरोसा जीतने का काम किया गया था, और सुरक्षा के साथ-साथ विकास के मोर्चे पर भी ठोस कदम उठाए गए थे।

सरकार से आर्थिक पैकेज का हिसाब-किताब मांगा
कांग्रेस ने भाजपा सरकार से तीखे सवाल करते हुए बस्तर के विकास से जुड़ी योजनाओं का हिसाब मांगा है। सुशील आनंद शुक्ला ने सरकार से पूछा है कि प्रदेश की प्रत्येक पंचायत को दो करोड़ रुपये देने का जो वादा किया गया था, वह वर्तमान में किस स्थिति में है? इसके अलावा, बस्तर के समग्र विकास के लिए घोषित 50 हजार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज का क्या हुआ? कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार इस पैकेज के तहत आवंटित राशि और खर्च किए गए फंड का ब्योरा सार्वजनिक करे ताकि जनता को पता चल सके कि बस्तर के विकास की दिशा में क्या काम हुआ है।
मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरों की विफलता पर घेराबंदी
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के बार-बार होने वाले दिल्ली दौरों पर भी निशाना साधा है। कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री कई बार बस्तर के विकास की कार्ययोजना लेकर दिल्ली गए, लेकिन धरातल पर उसका कोई परिणाम देखने को नहीं मिला। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि यदि बस्तर के विकास के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक स्वीकृति नहीं मिल पाई है, तो राज्य सरकार को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि मंजूरी मिलने में देरी क्यों हो रही है और केंद्र के समक्ष इस मामले को कितनी मजबूती से रखा गया है।
सरकार से पारदर्शिता और श्वेत पत्र की मांग
अंत में, कांग्रेस ने भाजपा सरकार से पूर्ण पारदर्शिता की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि नक्सलवाद पर अपनी उपलब्धियां गिनाना एक अलग विषय है, लेकिन बस्तर की जनता के साथ किए गए विकास के वादों को पूरा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार योजनाओं की वर्तमान स्थिति और विकास कार्यों का वास्तविक ब्योरा जनता के समक्ष रखे। हालांकि, कांग्रेस द्वारा उठाए गए इन गंभीर सवालों और आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे बस्तर की राजनीति में गरमाहट बढ़ गई है।
Read More : Durg Crime : दुर्ग में पीजी में घुसकर छात्रा की हत्या, अज्ञात युवक ने चाकू से किए ताबड़तोड़ वार











