TMC Rebel : पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष की आग सुलग रही है, जो अब एक गंभीर संकट में बदल गई है। पार्टी के बागी गुट ने ममता बनर्जी की कार्यप्रणाली को चुनौती देते हुए अपनी अलग राह पकड़ ली है। इसी क्रम में आज टीएमसी के बागी गुट ने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलावों की घोषणा की गई। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को हिलाकर रख दिया है, विशेषकर इसलिए क्योंकि इसमें ममता के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों का नाम भी शामिल है।

बीरभूम में बड़ा उलटफेर: अनुब्रत मंडल को सौंपी गई जिम्मेदारी
विपक्ष के नेता और बागी खेमे के नेतृत्वकर्ता ऋतब्रत बनर्जी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य के विभिन्न जिलों के लिए नए अध्यक्षों की सूची जारी की। इस सूची में सबसे चौंकाने वाला नाम अनुब्रत मंडल का रहा, जिन्हें बीरभूम जिले का अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। अनुब्रत मंडल, जिन्हें ममता बनर्जी का दाहिना हाथ और बेहद करीबी माना जाता रहा है, का नाम बागी गुट की सूची में आना टीएमसी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। हालाँकि, अनुब्रत मंडल ने अभी तक इस घोषणा पर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है और न ही उन्होंने सीधे तौर पर बागी गुट में शामिल होने की पुष्टि की है। उनके मौन ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।

ऋतब्रत बनर्जी का दावा: ‘जल्द ही और भी बड़े नेता होंगे शामिल’
बैठक के दौरान ऋतब्रत बनर्जी ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए। उन्होंने कहा कि पार्टी को जमीनी स्तर पर पुनर्गठित करने के उद्देश्य से पुराने अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने प्रसून बनर्जी को मालदा का अध्यक्ष, देबाशीष कुमार को दक्षिण कोलकाता और संदीपन साहा को उत्तरी कोलकाता जिले की जिम्मेदारी सौंपने की घोषणा की। ऋतब्रत ने आत्मविश्वास के साथ यह भी दावा किया कि आने वाले दिनों में कई और विधायक और कद्दावर नेता ममता बनर्जी का साथ छोड़कर उनके बागी खेमे में शामिल होंगे।
पर्दे के पीछे की खिचड़ी: 30 बार हुई बातचीत की पुष्टि
इस बगावत की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि उनकी अनुब्रत मंडल से पिछले कुछ दिनों में कम से कम 30 बार टेलीफोन पर बातचीत हुई है। वहीं, बैठक में मौजूद एक अन्य बागी विधायक अक्रूज्जमान ने भी संकेत दिए कि राजनीति में सब कुछ बहुत जल्द स्पष्ट हो जाएगा। हालांकि, दूसरी तरफ ममता बनर्जी के खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ है। अनुब्रत मंडल के इस मौन ने टीएमसी नेतृत्व को एक दुविधा में डाल दिया है। क्या वाकई ममता का सबसे विश्वसनीय सिपाही अब उनका साथ छोड़ चुका है? यह सवाल अब बंगाल की राजनीति के केंद्र में आ गया है। फिलहाल, टीएमसी का यह अंदरूनी कलह पार्टी के भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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