Maharashtra Politics : शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे ने राम मंदिर में चंदा चोरी के आरोपों और समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा प्रहार किया है। आदित्य ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा को सीधे निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि पार्टी अब ‘बाबर जनता पार्टी’ का रूप ले चुकी है। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर में कथित लूट के मामले से देश का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा द्वारा जानबूझकर UCC का मुद्दा उठाया जा रहा है। आदित्य ने यह भी स्पष्ट किया कि वे UCC के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन उससे पहले राम मंदिर में कथित चंदा चोरी की निष्पक्ष जांच सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशन में होनी चाहिए।

उद्धव ठाकरे का ‘राम रक्षा’ आंदोलन और भाजपा पर प्रहार
इस विवाद की शुरुआत शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा 5 जुलाई को शुरू किए गए ‘राम रक्षा’ आंदोलन से हुई। मुंबई के दादर स्थित हनुमान मंदिर में हनुमान चालीसा और स्तोत्र का पाठ करने के बाद उद्धव ने एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सत्ताधारी भाजपा पर सीधा हमला करते हुए कहा कि हिंदुओं को लूटने वाले लोग आज सत्ता में बैठे हैं। उद्धव ने जोर देकर कहा कि मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी की जांच किसी ऐसी एजेंसी से नहीं कराई जा सकती जो स्वयं सत्ता के दबाव में हो। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि कोई हिंदुत्व का नाम लेकर मंदिर को लूटने का प्रयास करेगा, तो हिंदू समाज उसे कभी माफ नहीं करेगा।

काशी-मथुरा पर चिंता और बाल ठाकरे की विरासत का स्मरण
उद्धव ठाकरे ने भाजपा के उस बहुचर्चित नारे, ‘अयोध्या तो झांकी है, काशी-मथुरा अभी बाकी हैं’, पर भी अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का भय है कि अयोध्या के बाद काशी और मथुरा में किस प्रकार की स्थितियां पैदा की जाएंगी। उद्धव ने खुद को और अपनी पार्टी को निडर और देश प्रेमी बताते हुए कहा कि हम सच्चे हिंदू हैं, लेकिन हमें मूर्ख नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने हिंदुओं को जागरूक करने का महान कार्य किया था, लेकिन वर्तमान में उसी हिंदुत्व को सम्मोहित करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।
चंदा चोरी मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई
राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे के दुरुपयोग का यह मामला पहली बार सात जून को प्रकाश में आया था, जिसके बाद हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसमें अब तक मंदिर की सुरक्षा और गिनती प्रक्रिया में शामिल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। शिवसेना (यूबीटी) का स्पष्ट मानना है कि यह जांच का दायरा केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके पीछे के मास्टरमाइंड को भी उजागर किया जाना चाहिए। यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक गलियारों में और अधिक गरमाने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।
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