INDIA Alliance : राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) को कड़ी चुनौती देने के लिए एक बड़ी विपक्षी एकता की तैयारी चल रही है। विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) ने सुझाव दिया है कि तमिलनाडु की दो प्रमुख विपक्षी पार्टियां—द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK)—को एनडीए के खिलाफ ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) ब्लॉक में शामिल होना चाहिए। कांग्रेस पार्टी ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा है कि सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एकजुट होकर उन नीतियों का विरोध करना चाहिए, जो कथित तौर पर लोकतंत्र को कमजोर कर रही हैं।

तमिलनाडु की राजनीति में बदलता समीकरण
तमिलनाडु में पिछले कुछ समय में राजनीतिक समीकरणों ने करवट ली है। राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन में टीवीके, कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल शामिल हैं। वहीं डीएमके विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभा रही है। 2023 में इंडिया ब्लॉक के गठन के बाद से डीएमके इसका हिस्सा थी, लेकिन राज्य की राजनीति में कांग्रेस द्वारा टीवीके सरकार को समर्थन देने के बाद से डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में खटास आ गई है। डीएमके ने हाल ही में कांग्रेस पर विश्वासघात का आरोप लगाया है और लोकसभा स्पीकर से संसद में अपने सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने का भी अनुरोध किया है, ताकि वह कांग्रेस के प्रति अपनी नाराजगी जता सके।

संसद का आगामी सत्र और विपक्ष की रणनीति
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद क्रिस्टोफर तिलक के अनुसार, आगामी मानसून सत्र बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार परिसीमन (Delimitation) और विदेशी चंदा नियमन से जुड़े विवादित विधेयकों को आगे बढ़ाने की योजना बना रही है। कांग्रेस का मानना है कि इन विधेयकों का असर दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के हितों पर पड़ेगा। जोथिमनी जैसे कांग्रेस सांसदों का तर्क है कि भले ही राज्यों की राजनीति में पार्टियां एक-दूसरे के धुर विरोधी हों, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की नीतियों का मुकाबला करने के लिए उन्हें साथ आना ही होगा। उन्होंने केरल और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल स्थानीय स्तर पर भले ही भिड़ते हों, लेकिन संसद में वे एनडीए के खिलाफ एक साथ खड़े रहते हैं।
DMK की प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा
डीएमके की ओर से अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। पार्टी के लोकसभा सांसद डीएम कथिर आनंद ने कहा कि नेतृत्व जल्द ही सभी सांसदों की बैठक बुलाकर संसद सत्र के लिए रणनीति को अंतिम रूप देगा। उन्होंने संकेत दिया कि राजनीति में कुछ भी स्थिर नहीं होता और परिस्थितियां गतिशील हैं। हालांकि उन्होंने यह दोहराया कि डीएमके हमेशा से धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या संसद के गलियारों में भाजपा का विरोध करने के लिए डीएमके और टीवीके जैसे धुर विरोधी राजनीतिक दल एक मंच पर आते हैं या नहीं। फिलहाल, विपक्ष की एकजुटता एनडीए के एजेंडे को रोकने के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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