Iran-US Tension: अमेरिकी विदेश नीति की एक प्रभावशाली आवाज और रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम का शनिवार, 11 जुलाई 2026 की शाम निधन हो गया। दक्षिण कैरोलाइना का दो दशकों से अधिक समय तक सीनेट में प्रतिनिधित्व करने वाले ग्राहम के कार्यालय ने उनके निधन की पुष्टि की है। सीनेटर के कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, उनका निधन एक बीमारी के कारण हुआ। उनके परिवार ने इस कठिन समय में निजता का सम्मान करने और प्रार्थनाओं की अपील की है। ग्राहम न केवल अमेरिकी राजनीति में एक कद्दावर नेता थे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मामलों, विशेषकर यूक्रेन युद्ध और रूस विरोधी नीतियों को लेकर उनकी भूमिका अत्यंत मुखर रही थी।

ईरान की ‘हिट लिस्ट’ और लिंडसे ग्राहम का नाम
लिंडसे ग्राहम के निधन के साथ ही ईरान द्वारा जारी की गई कथित ‘हिट लिस्ट’ का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। हाल ही में सामने आई तस्वीरों में लिंडसे ग्राहम के चेहरे पर क्रॉस का निशान दिखाया गया है, जिसे ईरान द्वारा उन्हें ‘टारगेट’ करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि ग्राहम लंबे समय से ईरान के निशाने पर थे। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान भी कुछ पोस्टरों में ग्राहम का नाम और तस्वीर शामिल थी, जिस पर टारगेट का साइन बना था। ईरान की ओर से हाल ही में जारी एक सूची में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम शीर्ष पर है, जबकि लिंडसे ग्राहम भी इस सूची का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते थे।

यूक्रेन दौरा और सुरक्षा को लेकर उठा सवाल
निधन से ठीक एक दिन पहले, सीनेटर लिंडसे ग्राहम यूक्रेन के दौरे पर थे, जहाँ उन्होंने एक ड्रोन निर्माण सुविधा का जायजा लिया था। उनकी अचानक मौत ने वैश्विक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है। हालांकि, आधिकारिक बयान में बीमारी को उनके निधन का कारण बताया गया है, लेकिन ईरान की शत्रुतापूर्ण सूची में उनका नाम होने के कारण इसे लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। ग्राहम यूक्रेन युद्ध में रूस के खिलाफ खड़े रहने वाले सबसे प्रबल समर्थकों में से एक थे और उन्होंने मास्को पर कड़े प्रतिबंध लगाने की जोरदार वकालत की थी।
ईरान और भारत पर अपनी मुखर राय के लिए चर्चित
लिंडसे ग्राहम अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते थे। उन्होंने ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को खुलकर ‘तानाशाह’ कहा था और यहां तक चेतावनी दी थी कि उनके नेतृत्व को खत्म कर देना चाहिए। इसके अलावा, विदेश नीति के मामलों पर वे हमेशा सख्त रुख अपनाते थे। यूक्रेन युद्ध के दौरान जब भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने का मामला उठा था, तब ग्राहम ने उसकी भी मुखर आलोचना की थी। एक प्रभावशाली सीनेटर के रूप में उनका जाना अमेरिकी राजनीति और वैश्विक कूटनीति के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके निधन के बाद अब ईरान की इस संदिग्ध ‘हिट लिस्ट’ और उनके राजनीतिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर बहस तेज हो गई है।
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