Voter ID New Rules: यदि आप पहली बार अपना वोटर आईडी कार्ड बनवाने की तैयारी कर रहे हैं या परिवार के किसी सदस्य का नाम मतदाता सूची में जुड़वाना चाहते हैं, तो चुनाव आयोग (EC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को जानना आपके लिए बेहद आवश्यक है। आयोग ने मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने और डेटा मैपिंग को बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन करते समय आवेदकों के लिए अपने माता-पिता की ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) डिटेल्स प्रदान करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नया नियम न केवल उन पुराने मतदाताओं पर लागू होता है जो पूर्व में सूची में शामिल होने से छूट गए थे, बल्कि प्रत्येक नए आवेदक के लिए भी अनिवार्य है।

ऑनलाइन आवेदन में तकनीकी अनिवार्यता
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए ऑनलाइन फॉर्म-6 में यह बदलाव किया गया है। वर्तमान व्यवस्था के तहत, जब तक आवेदक अपने माता-पिता के डेटा से संबंधित घोषणापत्र (Declaration) को पूर्ण नहीं करता, तब तक उसकी आवेदन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। आयोग का तर्क है कि इस व्यवस्था से नए वोटर्स को पहचान और पते के सत्यापन हेतु दस्तावेजों को जुटाने में काफी राहत मिलेगी, क्योंकि माता-पिता के रिकॉर्ड से आवेदक के विवरण का सत्यापन तेजी से हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि इस व्यवस्था का सफल परीक्षण पिछले वर्ष बिहार में चलाए गए एसआईआर (SIR) अभियान के दौरान किया गया था।

अंतरराष्ट्रीय दावों पर चुनाव आयोग का स्पष्ट रुख
इस प्रक्रिया को लेकर हाल ही में कुछ विवाद भी सामने आए थे। संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूतों द्वारा इस पर चिंता व्यक्त की गई थी और आरोप लगाया गया था कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम जैसे क्षेत्रों में अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम सूची से हटाने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, संवैधानिक मानदंडों के अनुरूप और सुप्रीम कोर्ट द्वारा समर्थित दिशा-निर्देशों के अधीन संचालित की जा रही है।
उद्देश्य: फर्जी मतदाताओं की पहचान और निष्पक्षता
चुनाव आयोग ने अपने बचाव में कहा कि इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाना है। आयोग का लक्ष्य सूची से डुप्लीकेट, मृत मतदाताओं और जो व्यक्ति अपना स्थान परिवर्तन कर चुके हैं, उनके नाम हटाना है। इसके साथ ही, विदेशी मतदाताओं की पहचान कर उन्हें सूची से बाहर करना भी इस प्रक्रिया का एक मुख्य हिस्सा है ताकि केवल योग्य भारतीय नागरिकों को ही मताधिकार प्राप्त हो। आयोग ने यह भी आश्वासन दिया है कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें अपनी बात रखने और अपील करने का पूरा अवसर प्रदान किया गया था, ताकि किसी भी पात्र नागरिक के अधिकारों का हनन न हो।
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