Bangladesh Flood: लगातार हो रही मूसलाधार मानसूनी बारिश और उफनती नदियों ने बांग्लादेश में हालात बेकाबू कर दिए हैं। भारत से सटे इलाकों में जलप्रलय जैसी स्थिति बनी हुई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बीते एक सप्ताह में आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 5 जुलाई से अब तक इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 44 लोगों की जान जा चुकी है। देशभर में 2.67 लाख से अधिक परिवार इस भीषण त्रासदी से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।

राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हजारों लोग
बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 44,000 से अधिक लोग अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं। इन विस्थापितों ने सरकार द्वारा बनाए गए अस्थायी राहत शिविरों में पनाह ली है। बांग्लादेश में वर्तमान में 1,100 से अधिक बाढ़ राहत केंद्र सक्रिय हैं, जहाँ प्रशासन और विभिन्न संस्थाएं प्रभावितों को भोजन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। कई परिवार अभी भी अपने जलमग्न घरों की छतों पर या सड़कों के किनारे प्लास्टिक की चादरों के नीचे रहने को मजबूर हैं।

खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं नदियां
बाढ़ पूर्वानुमान और चेतावनी केंद्र (FFWC) ने स्थिति के और बिगड़ने की आशंका जताई है। मेघना बेसिन और दक्षिण-पूर्वी पहाड़ी इलाकों की नदियां खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं। चिंता की बात यह है कि ब्रह्मपुत्र बेसिन के उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी जिलों में भी पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है। भारी बारिश के अलावा, ऊपरी इलाकों से आ रहे पानी के तेज बहाव ने निचले इलाकों को पूरी तरह जलमग्न कर दिया है, जिससे स्वास्थ्य केंद्रों तक की सेवाएं बाधित हो गई हैं।
राजधानी ढाका और चटोग्राम में थम गई रफ्तार
राजधानी ढाका में शनिवार रात से हुई मूसलाधार बारिश ने शहर की कमर तोड़ दी है। मौसम विभाग के अनुसार, केवल छह घंटों में 76 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिससे शहर का जल निकासी तंत्र पूरी तरह विफल हो गया। प्रमुख सड़कें, कॉलोनियां और निचले इलाके पानी में डूबे हुए हैं, जिससे यातायात ठप हो गया है। इसी तरह, बंदरगाह शहर चटोग्राम में भी हालात चिंताजनक हैं, जहाँ सड़कें और रिहायशी मकान पूरी तरह पानी के आगोश में समा गए हैं।
बचाव अभियान में सेना और वायुसेना जुटी
हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने युद्धस्तर पर राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। सबसे अधिक प्रभावित सात जिलों में बचाव अभियान के लिए सेना, नौसेना और वायुसेना को तैनात किया गया है। कॉक्स बाजार स्थित रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में हुए भूस्खलन में सात बच्चों और एक शिक्षक की मौत ने इस त्रासदी को और गहरा कर दिया है। जुलाई से सितंबर के बीच बांग्लादेश में बाढ़ आना मौसमी है, लेकिन इस बार भारतीय क्षेत्रों से आए पानी, मूसलाधार बारिश और बंगाल की खाड़ी के ऊंचे ज्वार ने मिलकर इस स्थिति को एक बड़ी राष्ट्रीय आपदा में बदल दिया है।
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