US Iran Attack : मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक अत्यंत विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गया है। रविवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के पांच प्रमुख प्रांतों—होर्मुगोजन, मरकाजी, अहवाज, बुशहर, खुजेस्तान और बलूचिस्तान-सिस्तान—को निशाना बनाते हुए जोरदार हमले किए। ‘एक्सियोस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी मिसाइल सिस्टम, एयर डिफेंस यूनिट्स और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की स्पीड बोट्स को मुख्य रूप से निशाना बनाया। इन हमलों के दौरान खुजेस्तान में एक व्यक्ति की मौत और पांच लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने भी बताया कि होर्मुगोजन प्रांत में एक रखरखाव कर्मचारी की मृत्यु हुई है, जबकि दो अन्य घायल हुए हैं।

बंदर अब्बास और केशम द्वीप पर जोरदार धमाके
सैन्य कार्रवाई की गूंज ईरान के दक्षिणी बंदरगाह शहर ‘बंदर अब्बास’ तक सुनाई दी, जहाँ कई धमाकों की आवाजें दर्ज की गईं। इसी तरह, पास के केशम द्वीप पर भी हमले हुए हैं। केशम के गवर्नर हुसैन अमीर तैमूरी ने जानकारी दी कि द्वीप पर करीब 10 से 11 ‘दुश्मन के गोले’ गिरे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सभी निशाने सैन्य ठिकानों पर केंद्रित थे, जिससे आम नागरिकों के बीच हताहत होने की कोई खबर नहीं है। हमलों के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपने घातक हथियारों, जिनमें F-22 रैप्टर, B-1B लैंसर और B-2 स्पिरिट बॉम्बर्स शामिल हैं, की तस्वीरें साझा कर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है।

अमेरिका का स्पष्ट रुख: होर्मुज जलमार्ग की सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी सेंटकॉम (US CENTCOM) ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया है कि ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में व्यावसायिक जहाजों को सुरक्षित रखने के लिए किए गए हैं। वाशिंगटन का मानना है कि ईरान की इन क्षेत्रों में सैन्य सक्रियता वैश्विक व्यापार के लिए एक गंभीर खतरा है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि यदि होर्मुज जैसे व्यस्त समुद्री मार्गों को बाधित किया जाता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक खतरनाक मिसाल साबित होगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने इन हमलों को ईरानी सेना को उनके कार्यों के लिए ‘जवाबदेह’ ठहराने की एक अनिवार्य प्रक्रिया बताया है, ताकि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
60 दिवसीय अंतरिम शांति समझौता हुआ विफल, फिर भड़की जंग
दोनों देशों के बीच शांति बहाली के लिए पिछले कुछ समय से चल रही 60 दिवसीय अंतरिम समझौते की प्रक्रिया बीच में ही ध्वस्त हो गई है। शांति वार्ता पूरी होने से पहले ही नए सैन्य टकराव ने सभी कूटनीतिक प्रयासों पर पानी फेर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे अब इस युद्धविराम को प्रभावी रूप से समाप्त मानते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा है कि उनके दरवाजे भविष्य की किसी भी बातचीत के लिए पूरी तरह खुले हैं। ईरान भी फिलहाल अपने रुख पर अडिग है और पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दे रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मोर्चे पर गहरी अनिश्चितता बनी हुई है।












