Aamir Khan Controversy : महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे द्वारा अभिनेता आमिर खान की निजी जिंदगी पर की गई टिप्पणी ने एक नया सियासी और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। राणे ने आमिर खान को ‘लव जिहाद का ब्रांड एंबेसडर’ बताते हुए निशाना साधा था। अब इस विवाद में तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य भी कूद पड़े हैं। उन्होंने न केवल नितेश राणे के बयान का खुलकर समर्थन किया है, बल्कि अभिनेता को लेकर एक बेहद विवादास्पद और भड़काऊ घोषणा भी कर दी है। आचार्य के इस बयान ने देश भर में चर्चा और आलोचनाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

5 करोड़ के इनाम का ऐलान, हिंसा को उकसाने का आरोप
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने आमिर खान पर गंभीर आरोप लगाते हुए हिंसा भड़काने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अभिनेता ने हिंदू महिलाओं से शादियां करके ‘लव जिहाद’ का संदेश फैलाया है। आचार्य ने घोषणा की कि जो भी आमिर खान को “टपका देगा” (मार देगा), उसे उनके द्वारा 5 करोड़ रुपये का इनाम दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि हत्या के बाद होने वाले कानूनी खर्च का जिम्मा भी वे खुद उठाएंगे। आचार्य का तर्क है कि यदि ऐसे 100-200 लोगों को खत्म कर दिया जाए, तो कथित ‘लव जिहाद’ की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

मजहबी कट्टरता और समाज में नफरत का माहौल
परमहंस आचार्य ने अपनी टिप्पणी में मजहबी कट्टरता को बढ़ावा देने वाली भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि जिस मजहब में हिंदू देवी-देवताओं की पूजा को ‘हराम’ माना जाता है, वहां के लोगों को हिंदू बहन-बेटियों से शादी करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों को जिंदा छोड़ना ही गलत है और उन्हें हर हाल में खत्म कर दिया जाना चाहिए। उनका यह बयान न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज में सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करने वाला भी माना जा रहा है।
राम मंदिर ट्रस्ट और राजनीतिक बयानबाजी
अपने विवादास्पद बयानों के बीच, जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने अयोध्या में राम मंदिर दान मामले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार हुआ है और इसकी जांच पूरी ईमानदारी से की जा रही है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘राम विरोधी’ लोग अपनी साजिशों के तहत हंगामा कर रहे हैं। उन्होंने टिन्नू यादव का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव और ‘इंडिया’ गठबंधन को भी घेरे में लिया और उन पर मंदिर निर्माण में बाधा डालने के आरोप लगाए।
कानून और मर्यादा का सवाल
एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति और एक धार्मिक गुरु द्वारा इस तरह की हिंसक भाषा का प्रयोग कानून के शासन के लिए एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। सार्वजनिक मंचों से किसी की हत्या पर इनाम घोषित करना भारतीय कानून के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। अब देखना यह है कि प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस भड़काऊ बयानबाजी पर क्या कार्रवाई करती हैं। इस तरह के बयानों से देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचने की प्रबल संभावना बनी रहती है।
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