Hormuz Strait : होर्मुज में कितने भारतीय जहाज मौजूद, 140 नाविक फंसे; एक की मौत, एक अब भी लापता

Hormuz Strait :  पश्चिम एशिया (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को गंभीर संकट में डाल दिया है। इस तनाव की आंच अब सीधे तौर पर भारतीय जहाजों और वहां काम कर रहे नाविकों तक पहुँच गई है। रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के पश्चिमी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले सात व्यापारिक जहाज और उन पर सवार लगभग 148 भारतीय नाविक फँस गए हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को इस चिंताजनक स्थिति की पुष्टि करते हुए बताया कि क्षेत्र में व्याप्त अशांति और सैन्य तनाव को देखते हुए इन जहाजों के फिलहाल फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से सुरक्षित बाहर निकलने की कोई तात्कालिक संभावना नहीं है।

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सुरक्षा स्थिति का आकलन: फिलहाल प्रतीक्षा ही एकमात्र विकल्प

सरकारी अधिकारी ने समाचार एजेंसी ‘पीटीआई-भाषा’ को जानकारी देते हुए बताया कि फारस की खाड़ी में इस समय मौजूद सात भारतीय जहाजों में से पाँच जहाज अपनी नियमित वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए वहाँ गए थे। हालाँकि, मौजूदा सुरक्षा हालात इतने गंभीर हैं कि किसी भी जहाज की आवाजाही जानलेवा साबित हो सकती है। अधिकारी ने स्पष्ट किया, “मौजूदा गंभीर सुरक्षा स्थिति को देखते हुए फिलहाल उनकी इस अशांत क्षेत्र से बाहर आने की कोई योजना नहीं है। सभी जहाज और नाविक सुरक्षित स्थान पर बने हुए हैं और वे तनाव के कम होने का इंतजार करेंगे।” भारतीय नौवहन विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि सही समय पर नाविकों को सुरक्षित निकाला जा सके।

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व्यापारिक जहाजों पर सिलसिलेवार हमले और बढ़ता खतरा

यह चिंताजनक परिदृश्य पिछले कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर हुए सिलसिलेवार हमलों के बाद पैदा हुआ है। 14 जुलाई की तड़के ‘एमटी अल बह्याह’ (MT Al Bahyah) और ‘एमटी मोम्बासा बी’ (MT Mombasa B) नामक दो व्यापारिक जहाजों को भीषण हमलों का सामना करना पड़ा। इन हमलों की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकारी ने पुष्टि की है कि ‘एमटी अल बह्याह’ पर सवार चालक दल के एक भारतीय सदस्य की इन हमलों में दुखद मौत हो गई है। यह घटना क्षेत्र में तैनात नाविकों की सुरक्षा को लेकर गहरे सवाल खड़े करती है।

लापता नाविकों की तलाश और अंतरराष्ट्रीय चिंता

इस तनावपूर्ण माहौल के बीच केवल ‘एमटी अल बह्याह’ ही नहीं, बल्कि अन्य जहाज भी निशाने पर रहे हैं। हमलों से महज दो दिन पहले, साइप्रस के ध्वज वाले कंटेनर जहाज ‘जीएफएस गैलेक्सी’ (GFS Galaxy) पर एक ईरानी हमला हुआ था। इस हमले के बाद से जहाज पर सवार एक भारतीय चालक दल का सदस्य रहस्यमय तरीके से लापता है, जिसकी तलाश अभी भी जारी है। एक के बाद एक हुई इन घटनाओं ने भारतीय नाविकों के परिवारों में दहशत पैदा कर दी है। भारतीय अधिकारी कूटनीतिक स्तर पर इन सभी मुद्दों को सुलझाने और अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहा यह सैन्य संघर्ष न केवल तेल आपूर्ति के लिए खतरनाक है, बल्कि समुद्र में काम करने वाले नाविकों की जान के लिए भी सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

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Chandan Das

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