Bread Cancer Myth : पिछले एक दशक में वैश्विक स्तर पर कैंसर के मामलों में हुई वृद्धि ने लोगों को स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक और सतर्क बना दिया है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि असंतुलित जीवनशैली, मिलावटी खाद्य पदार्थ और बढ़ता तनाव कैंसर के प्रमुख कारण हैं। हालांकि, इस गंभीरता के बीच कैंसर से जुड़ी कई भ्रांतियां और अंधविश्वास भी सोशल मीडिया के माध्यम से तेजी से फैल रहे हैं। आम धारणा बन गई है कि ब्रेड खाने या गैस पर चपाती सेंकने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इन दावों की वैज्ञानिक सत्यता को स्पष्ट करते हुए रायपुर के प्रसिद्ध कैंसर सर्जन डॉक्टर जयेश शर्मा ने हाल ही में एक वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने इन भ्रांतियों का खंडन करते हुए वस्तुस्थिति स्पष्ट की है।

ब्रेड और कैंसर का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
डॉक्टर जयेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि ब्रेड से कैंसर होने के पीछे मुख्य रूप से दो तर्क दिए जाते हैं—पहला ‘एक्रिलामाइड’ (Acrylamide) का बनना और दूसरा ‘शुगर स्पाइक’। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, एक्रिलामाइड उच्च मात्रा में जानवरों में कैंसर का कारक पाया गया है, लेकिन मनुष्यों में इससे कैंसर होने का अब तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। गौर करने वाली बात यह है कि एक्रिलामाइड केवल ब्रेड में ही नहीं, बल्कि समोसे, कचौड़ी और फ्रेंच फ्राइज जैसे डीप-फ्राइड खाद्य पदार्थों में अधिक मात्रा में होता है। यदि आप संतुलित आहार के हिस्से के रूप में ब्रेड का सेवन करते हैं, तो यह शरीर के लिए हानिकारक नहीं है। वहीं, बेक्ड उत्पादों से होने वाला शुगर स्पाइक मोटापा और सूजन (inflammation) बढ़ा सकता है, इसलिए इनका सेवन सीमित मात्रा में करना ही उचित है।

ब्रेड के प्रकार और भ्रम की स्थिति
बाजार में उपलब्ध ब्रेड के विभिन्न विकल्पों—सफेद, ब्राउन और मल्टीग्रेन—पर चर्चा करते हुए डॉक्टर ने बताया कि होल वीट और मल्टीग्रेन ब्रेड निश्चित रूप से सफेद ब्रेड से बेहतर विकल्प हैं। हालांकि, सफेद और ब्राउन ब्रेड में कोई विशेष अंतर नहीं होता। कई बार ब्राउन ब्रेड को रंग या चॉकलेट का अर्क डालकर तैयार किया जाता है, जिससे उसका स्वाद थोड़ा कड़वा हो सकता है, लेकिन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से दोनों लगभग एक समान हैं। ब्रेड खाने से कैंसर होने का दावा पूरी तरह आधारहीन है, बशर्ते उसे सलाद और प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों के साथ संतुलित आहार के रूप में शामिल किया जाए।
गैस पर रोटी सेंकना और कैंसर का मिथक
भारतीय घरों में एक बड़ी भ्रांति यह भी है कि गैस चूल्हे पर सीधे रोटी सेंकने से गैस के हानिकारक रसायन रोटी के अंदर चले जाते हैं और कैंसर का कारण बनते हैं। डॉक्टर जयेश ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जलने के बाद गैस के रसायनों का प्रभाव समाप्त हो जाता है और यदि ऐसा होता, तो रोटी से गैस की बदबू आती। रोटी में गैस की कोई गंध नहीं होती है, इसलिए यह पूरी तरह सुरक्षित है।
हालांकि, रोटी को बहुत अधिक सेंककर उस पर काले धब्बे (charring) पैदा करना उचित नहीं है। अत्यधिक सिकी हुई या जली हुई रोटी में एक्रिलामाइड की मात्रा बढ़ सकती है, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं है। इसलिए, रोटी को हल्की आंच पर सामान्य रूप से सेंकना ही सर्वोत्तम है। निष्कर्षतः, ब्रेड और गैस पर सिकी हुई रोटी से कैंसर का कोई संबंध नहीं है, और ऐसी भ्रामक जानकारियों से बचना चाहिए।












