Windfall Tax : सरकार ने अचानक क्यों बढ़ाया विंडफॉल टैक्स, जानिए तेल बाजार की पूरी कहानी अब

Windfall Tax : पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी देखी जा रही है। इस वैश्विक उठापटक के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर लगने वाले ‘विंडफॉल टैक्स’ (Windfall Tax) में भारी बढ़ोतरी कर दी है। वहीं, राहत देते हुए सरकार ने पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली लेवी को कम करने का फैसला लिया है। ये नए बदलाव आज, 16 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गए हैं। सरकार द्वारा हर 15 दिन में की जाने वाली इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव और घरेलू ईंधन की कीमतों के बीच संतुलन बनाए रखना है।

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विंडफॉल टैक्स: पेट्रोल सस्ता, डीजल और ATF हुआ महंगा

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को 4 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके विपरीत, डीजल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स को 8.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी तरह, ATF (विमान ईंधन) के निर्यात पर भी लेवी को 7.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। यह संशोधन वैश्विक बाजार में रिफाइनिंग मार्जिन में हुए बदलावों के कारण किया गया है, ताकि तेल कंपनियों द्वारा प्राप्त किए जा रहे असाधारण लाभ को नियंत्रित किया जा सके।

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कच्चा तेल और होर्मुज जलडमरूमध्य का भू-राजनीतिक संकट

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रही हैं। आज ब्रेंट क्रूड 0.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 85.25 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। कीमतों में इस तेजी के पीछे का सबसे बड़ा कारण अमेरिका द्वारा ईरान पर दोबारा लागू की गई नौसैनिक नाकाबंदी है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया भर में तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है, वहां बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। ईरान-युद्ध से पहले, विश्व का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकीर्ण रास्ते से गुजरता था, इसलिए यहां कोई भी हलचल सीधे तौर पर तेल की कीमतों को प्रभावित करती है।

रूस की आपूर्ति और ईंधन की घरेलू चुनौतियां

रूस से होने वाले निर्यात में कमी और वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों के कारण डीजल रिफाइनिंग मार्जिन काफी बढ़ गया है, जिससे पूरे फ्यूल मार्केट पर दबाव बना हुआ है। घरेलू मोर्चे पर बात करें तो, जमाखोरी और डायवर्जन को रोकने के लिए सरकार ने 11 जून को औद्योगिक और कमर्शियल ग्राहकों के लिए पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने पर अस्थायी रोक लगाई थी, ताकि रिटेल ग्राहकों के लिए पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे। हालांकि, बाजार की स्थिति सामान्य होने पर 1 जुलाई से ये पाबंदियां हटा दी गई हैं। सरकार का प्रयास है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों की गर्मी का सीधा असर आम भारतीय उपभोक्ताओं पर न पड़े और ईंधन की निरंतरता बनी रहे।

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Chandan Das

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