US Iran War : पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण सैन्य टकराव के बीच ईरान के सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने एक बड़ी सैन्य कामयाबी का दावा किया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ के अनुसार, IRGC ने देश के दक्षिण-पश्चिमी शहर अंदिमेश्क के ऊपर उड़ रहे एक दुश्मन ड्रोन को मार गिराया है। बाद में यह स्पष्ट हुआ कि नष्ट किया गया यह विमान अमेरिका का सबसे आधुनिक और घातक निगरानी ड्रोन ‘MQ-9 रीपर’ था। अरबों रुपये की लागत वाला यह अत्याधुनिक ड्रोन अमेरिकी वायुसेना के लिए एक प्रमुख संपत्ति माना जाता है, जिसे हवा में मार गिराना अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान के लिए एक बहुत बड़ा झटका है।

स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम ने दिखाया अपना जलवा
IRGC ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि इस अमेरिकी ड्रोन को निशाना बनाने के लिए उनकी एयरोस्पेस फोर्स ने पूरी तरह से स्वदेशी और हाल ही में विकसित ‘एयर डिफेंस सिस्टम’ का उपयोग किया। यह नया मिसाइल सिस्टम न केवल दुश्मन के आधुनिक ड्रोन को ट्रैक करने में सक्षम रहा, बल्कि उसने सटीक निशाना साधकर उसे बीच हवा में ही नष्ट कर दिया। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान द्वारा इस नई वायु रक्षा प्रणाली का सफलतापूर्वक प्रदर्शन करना यह दर्शाता है कि उनकी सैन्य तकनीक अब और अधिक घातक हो गई है। यह घटना क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य संपत्तियों की सुरक्षा पर भी कई बड़े सवाल खड़े कर रही है।

तेहरान में हाई अलर्ट: मिसाइल सिस्टम हुए सक्रिय
इस घटना के तुरंत बाद पूरे ईरान में सुरक्षा संबंधी अलर्ट जारी कर दिया गया है। ‘मेहर’ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी तेहरान में संभावित अमेरिकी जवाबी कार्रवाई से निपटने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय (एक्टिव) कर दिया गया है। तेहरान के आसमान में सुरक्षा घेरे को बेहद मजबूत कर दिया गया है और सैन्य बलों को किसी भी आपात स्थिति के लिए हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया है। ईरान अब किसी भी बाहरी हमले या जवाबी सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत के साथ तैयार दिख रहा है।
अमेरिका के दो चरणों में ताबड़तोड़ हवाई हमले
ईरान की इस कार्रवाई के जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए अपने हवाई हमलों की पुष्टि की है। अमेरिकी वायुसेना ने दो अलग-अलग चरणों में ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। पेंटागन के अनुसार, इन हमलों का प्राथमिक लक्ष्य ईरान की उन मिसाइल क्षमताओं और सैन्य ठिकानों को ध्वस्त करना है, जिनका उपयोग वह होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों को डराने और वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित करने के लिए कर रहा था। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। ड्रोन के विनाश और अमेरिका द्वारा की गई इस बमबारी के बाद मध्य पूर्व का यह टकराव अब पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होता हुआ प्रतीत हो रहा है, जिसने वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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