Prison Love Story : कहावत है कि प्यार किसी भी बंधन को नहीं मानता, और यह सच जोधपुर की एक ओपन जेल में चरितार्थ हुआ है। हत्या के अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे दो कैदी अब जीवन भर के लिए एक-दूसरे के होने जा रहे हैं। यह अनूठी प्रेम कहानी मंडोर स्थित ओपन एयर कैंप की है, जहाँ मूलाराम और सीमा को एक-दूसरे से प्यार हो गया। नागौर जिले का रहने वाला मूलाराम पड़ोसी की हत्या के जुर्म में सजा काट रहा है, वहीं मुंबई की सीमा अपने पति की हत्या की दोषी है। जेल की खुली फिजाओं और खेतों में साथ काम करते हुए दोनों की मुलाकात हुई, जो धीरे-धीरे अटूट प्रेम में बदल गई।

अनुच्छेद-21 का हवाला देते हुए हाईकोर्ट का मानवीय फैसला
इस अनोखे प्रेम को मुकम्मल करने के लिए दोनों ने राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने इस मामले में अत्यंत मानवीय और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि दो बालिग व्यक्तियों का अपनी इच्छा से विवाह करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के अंतर्गत ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता’ का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि जेल की सजा किसी व्यक्ति के विवाह करने के अधिकार को पूरी तरह समाप्त नहीं करती, विशेषकर जब वे ओपन जेल में हों।

मंडोर ओपन जेल में सजेंगे शादी के विशेष मंडप
हाईकोर्ट के आदेश के बाद आगामी 22 जुलाई को मंडोर की खुली जेल में शादी की शहनाइयां बजेंगी। इस समारोह के लिए प्रशासन ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विवाह में दोनों पक्षों के अधिकतम 21-21 परिजनों को शामिल होने की अनुमति मिली है, साथ ही एक पंडित भी मौजूद रहेंगे। दिलचस्प बात यह है कि जेल में सीमा की एक सहेली है, जिसके पिता इस विवाह में सीमा का ‘कन्यादान’ करेंगे। समारोह का पूरा खर्च कैदी खुद उठाएंगे। जेल प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि सुरक्षा और अनुशासन के मानकों का कड़ाई से पालन करते हुए विवाह संपन्न कराया जाए।
कैदियों के सामाजिक पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी का प्रयास
राजस्थान सरकार ने भी इस विवाह पर अपनी सकारात्मक सहमति जताई है। सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्हें ओपन एयर कैंप में इस तरह के आयोजनों से कोई आपत्ति नहीं है। कानूनविदों का मानना है कि यह पहल कैदियों के सामाजिक पुनर्वास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। शादी के बाद मूलाराम और सीमा पति-पत्नी के रूप में ओपन जेल में साथ रह सकेंगे। यह निर्णय न केवल दोनों कैदियों के जीवन में नई उम्मीदें जगाता है, बल्कि जेल प्रणाली में मानवीय दृष्टिकोण को भी बढ़ावा देता है, जिससे कैदियों को अपराध की दुनिया से दूर कर समाज की मुख्यधारा में वापस लाने का मार्ग प्रशस्त होता है।
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