Hyderabad School : हैदराबाद के एक निजी स्कूल में दूसरी कक्षा के एक हिंदू छात्र को होमवर्क के रूप में ‘कलमा’ याद करने के लिए दिए जाने का मामला तूल पकड़ गया है। इस घटना के सामने आने के बाद छात्र के अभिभावकों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया और इसे अपने बच्चे के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से शिक्षिका शेख आयशा को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। हालांकि, यह कार्रवाई अभिभावकों और भाजपा नेताओं के गुस्से को शांत करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि यह एक अनजाने में हुई गलती थी, लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।

भाजपा का कांग्रेस सरकार पर ‘धर्मांतरण माफिया’ को बढ़ावा देने का आरोप
इस पूरे मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने तेलंगाना की कांग्रेस सरकार पर सीधा हमला बोला है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि स्कूल प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई ‘बहुत कम और बहुत देर से’ की गई है। उन्होंने इसे महज एक गलती मानने से इनकार कर दिया और इस घटना को ‘एजुकेशन जिहाद’ का नाम दिया। भाजपा का आरोप है कि राज्य में रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार और एआईएमआईएम की मिलीभगत से ऐसे तत्वों को संरक्षण मिल रहा है, जो हिंदू बच्चों को जबरन इस्लामी प्रार्थनाएं पढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

राजनीतिक बयानबाजी और कांग्रेस की ‘तुष्टीकरण’ की नीति पर सवाल
भाजपा के दूसरे प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इस विवाद को कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ते हुए तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी का रुख हमेशा से ‘हिंदू-विरोधी’ रहा है और उसी के प्रभाव में तेलंगाना में एक ‘धर्मांतरण माफिया’ सक्रिय हो गया है। भंडारी ने दावा किया कि कांग्रेस और असदुद्दीन ओवैसी के बीच मिलीभगत है, जिसके कारण ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने से सरकार बच रही है। उन्होंने आगे कहा कि ओवैसी जैसे नेता जो अक्सर धर्मनिरपेक्षता और हिजाब की बात करते हैं, इस घटना पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं, जो उनकी दोहरी मानसिकता को उजागर करता है।
प्रशासन और सुरक्षा पर उठ रहे बड़े सवाल
यह मामला केवल एक होमवर्क तक सीमित न रहकर राज्य की कानून-व्यवस्था और शैक्षिक वातावरण पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा गया है। भाजपा नेताओं ने सरकार से मांग की है कि न केवल संबंधित शिक्षिका बल्कि पूरे स्कूल प्रशासन और प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को शिक्षा के लिए स्कूल भेजते हैं, न कि उनका धर्म परिवर्तन करने या किसी विशेष धार्मिक आयत को रटने के लिए। फिलहाल, इस घटना के बाद हैदराबाद के कई अभिभावक संघों ने स्कूलों की कार्यप्रणाली पर कड़ी निगरानी रखने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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