Old SBI Passbook : घर की गहन सफाई करते समय अक्सर हमें ऐसी चीजें मिल जाती हैं जो बरसों से किसी कोने में धूल फांक रही होती हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही चौंकाने वाली घटना ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। एक युवक को अपने दिवंगत दादाजी की करीब 20-25 साल पुरानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की पासबुक मिली। जब परिवार ने इस पुरानी और फटी-पुरानी पासबुक को खोला, तो वे दंग रह गए। इस खाते में जमा धनराशि को देखकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। महिला ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस घटना को साझा करते हुए बताया कि उनके परिवार के लिए यह किसी बड़े खजाने के मिलने जैसा है, क्योंकि 20 साल पहले एक लाख रुपये की अहमियत आज के समय से कहीं अधिक थी।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: क्या पैसा हो गया ‘लैप्स’?
पासबुक मिलने के बाद परिवार के मन में कई सवाल उठने लगे। चूंकि खाताधारक (दादाजी) का देहांत हो चुका है और खाता पिछले दो दशकों से निष्क्रिय (inoperative) पड़ा है, इसलिए परिवार को चिंता सताने लगी कि क्या उनका यह पैसा डूब चुका है? महिला ने सोशल मीडिया पर लोगों से सलाह मांगी कि क्या अब भी इन पैसों को निकाला जा सकता है या बैंक ने इसे ‘डेड’ घोषित कर दिया होगा। यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और बैंकिंग नियमों की जानकारी रखने वाले कई जागरूक नागरिकों ने उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास किया, जिससे उन्हें राहत की सांस मिली।

आरबीआई के नियम: ‘अनक्लेम्ड डिपॉजिट’ पर क्या कहती है गाइडलाइन?
बैंकिंग विशेषज्ञों और जागरूक यूजर्स ने स्पष्ट किया कि बरसों से इस्तेमाल न होने के बावजूद पैसा कहीं नहीं जाता। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, यदि किसी खाते में 10 वर्षों से अधिक समय तक कोई लेनदेन नहीं होता है, तो उसे ‘अनक्लेम्ड डिपॉजिट’ (Unclaimed Deposits) की श्रेणी में डालकर ‘DEAF’ (Depositor Education and Awareness Fund) में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि पैसा डूब गया है; यह राशि सुरक्षित रहती है और कानूनी उत्तराधिकारी इसे वापस पाने का पूरा हक रखते हैं। बस इसके लिए प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
पैसे निकालने की प्रक्रिया: किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?
इस राशि को वापस पाने के लिए परिवार को सबसे पहले बैंक की उस मुख्य शाखा में जाना होगा जहाँ खाता खोला गया था। प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। इसमें सबसे पहले दादाजी का मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) अनिवार्य है। इसके अलावा, परिवार को खुद को ‘कानूनी उत्तराधिकारी’ सिद्ध करने के लिए लीगल हायर सर्टिफिकेट (Legal Heir Certificate) या सक्सेशन सर्टिफिकेट (Succession Certificate) दिखाना होगा। यदि खाते में पहले से कोई नॉमिनी दर्ज है, तो यह प्रक्रिया काफी सरल और तेज हो जाती है। अंत में, परिवार के सदस्यों को अपने वैध पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड) जमा करने होंगे। बैंक के सत्यापन के बाद जमा राशि ब्याज सहित परिवार को सौंप दी जाएगी।
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