Chhattisgarh Assembly : छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र हंगामेदार रहा। पूर्व मुख्यमंत्री और विधायक भूपेश बघेल ने तिल्दा ब्लॉक के देवरी घुलघुल और अलदा गांव में औद्योगिक इकाइयों के लिए भूमि आवंटन में नियमों की अनदेखी का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या ‘बालाजी स्पंज एवं आयरन लिमिटेड’ और ‘अग्रसेन स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को भूमि देने के मामले में ग्रामसभा के प्रस्तावों और पर्यावरण एनओसी की प्रक्रिया का पालन किया गया है। बघेल का आरोप है कि ग्राम पंचायत के प्रस्ताव में कूट रचना (फर्जीवाड़ा) की गई है, जिसकी जांच रिपोर्ट पिछले साल ही आ चुकी है, लेकिन अब तक किसी दोषी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। इस पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि जांच चल रही है और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया।

सेवाग्राम परियोजना और विचारधारा पर भिड़े सत्ता-विपक्ष
सदन में सेवाग्राम परियोजना को लेकर भी जमकर नोकझोंक हुई। विधायक अजय चंद्राकर ने आरोप लगाया कि इन योजनाओं में बिना किसी ठोस वित्तीय स्रोत के भारी भरकम राशि खर्च की गई है। जवाब में भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया कि सेवाग्राम का प्रस्ताव गांधी जी की 150वीं जयंती के अवसर पर विशेष सत्र में लाया गया था, जिसे वर्धा की तर्ज पर विकसित किया जाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार गांधीवादी विचारधारा की नहीं है, इसलिए वे अब इन परियोजनाओं के नाम बदलकर अपनी पसंद के नामों पर रखने की तैयारी कर रहे हैं। इस पर वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया कि भविष्य में बजट खर्च के लिए एक निश्चित रूपरेखा तैयार की जाएगी।

ऑनलाइन सट्टा मामले में बघेल का सरकार पर पलटवार
विधानसभा में ऑनलाइन सट्टा (बेटिंग एप) का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में रहा। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस मामले में उन्हें और उनके सहयोगियों को निशाना बनाया गया, आज उसी केस में दिल्ली के एक बड़े व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई है, जिसका भाजपा के शीर्ष नेताओं से गहरा संबंध है। उन्होंने आरोप लगाया कि सट्टा कारोबार आज भी भाजपा की छत्रछाया में फल-फूल रहा है। इसके जवाब में डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है और सट्टा मामले में कोई भी दोषी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार के संरक्षण की तुलना में अब कार्रवाई कहीं अधिक कड़ी और पारदर्शी है।
अजय चंद्राकर और भूपेश बघेल के बीच वाकयुद्ध
सदन की कार्यवाही के दौरान अजय चंद्राकर और भूपेश बघेल के बीच तल्ख टिप्पणियां भी सुनने को मिलीं। बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि चंद्राकर ‘महाज्ञानी’ हैं और वे खुद प्रश्न पूछ सकते हैं, लेकिन दूसरों के उत्तर देने पर टोकते हैं। उन्होंने बताया कि शून्यकाल के दौरान चंद्राकर ने उनके बोलने पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद उन्होंने खेद भी प्रकट किया। सदन के भीतर इन मुद्दों को लेकर हुई यह गहमागहमी राज्य की राजनीतिक सक्रियता को दर्शाती है, जहां सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच हर मामले पर तीखी नोंक-झोंक देखने को मिल रही है।











