CG News : छत्तीसगढ़ में वर्षों से विभिन्न शासकीय कार्यालयों में संलग्न होकर गैर-शैक्षणिक कार्य कर रहे शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ अब शासन ने सख्त रुख अपना लिया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिन कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त कर उन्हें मूल संस्था में लौटने का आदेश दिया गया है, यदि वे निर्धारित समय-सीमा में कार्यभार ग्रहण नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ ‘ब्रेक इन सर्विस’ (सेवा हरण) की कार्रवाई का प्रस्ताव संचालनालय को भेजा जाएगा। इस आदेश के बाद लंबे समय से मंत्रालय, कलेक्टोरेट, राजस्व विभाग सहित विभिन्न कार्यालयों में कार्यरत संलग्न कर्मचारियों में हलचल मच गई है।



लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 15 जुलाई 2026 को जारी पत्र में सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि 14 जुलाई 2026 को जारी संलग्नीकरण समाप्त करने संबंधी आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। आदेश के अनुसार शासकीय कार्यालयों में कार्यरत सभी गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त कर उन्हें एक सप्ताह के भीतर अपनी मूल पदस्थ संस्था में कार्यभार ग्रहण करना होगा तथा ऑनलाइन एप के माध्यम से अपनी उपस्थिति भी दर्ज करनी होगी।
संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी निर्धारित समय-सीमा के बाद अपनी मूल संस्था में कार्यभार ग्रहण करेंगे, उनकी समय-सीमा समाप्त होने से लेकर कार्यभार ग्रहण करने तक की अवधि को ‘ब्रेक इन सर्विस’ माना जाएगा। ऐसे सभी मामलों का प्रस्ताव संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों को संचालनालय भेजना अनिवार्य होगा।
गौरतलब है कि प्रदेश में वर्षों से बड़ी संख्या में शिक्षक और अन्य शिक्षा विभाग के कर्मचारी शिक्षण कार्य छोड़कर मंत्रियों के कार्यालय, कलेक्टोरेट, राजस्व विभाग तथा अन्य शासकीय कार्यालयों में संलग्न होकर काम कर रहे हैं। इस व्यवस्था को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं, क्योंकि इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी और पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
“हालांकि, इससे पहले भी शासन कई बार संलग्नीकरण समाप्त करने के आदेश जारी कर चुका है, लेकिन अधिकांश मामलों में वे केवल कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह गए। इस बार संचालनालय द्वारा ‘ब्रेक इन सर्विस’ जैसी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बाद माना जा रहा है कि वर्षों से चले आ रहे संलग्नीकरण पर वास्तव में रोक लग सकती है और शिक्षक अपने मूल विद्यालयों में लौटकर शिक्षण कार्य संभालेंगे। “












