Sonam Wangchuk Hunger Strike : दिल्ली के जंतर-मंतर पर लद्दाख के हितों और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक पिछले 19 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। इस लंबे उपवास के कारण उनके स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा है और गुरुवार, 16 जुलाई तक उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक घट चुका है। उनके स्वास्थ्य में आ रही गिरावट को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हलकों से प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने वांगचुक की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उनसे अपना अनशन समाप्त करने की अपील की है, साथ ही यह भी कहा कि मोदी सरकार के प्रति ऐसी संवेदनशीलता की उम्मीद रखना निरर्थक है।

संदीप दीक्षित के सवाल: आंदोलन के मूल्यों पर खड़ी की चुनौती
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने सोनम वांगचुक के आंदोलन का समर्थन करने के बावजूद उनकी वैचारिक स्पष्टता पर कड़े सवाल उठाए हैं। दीक्षित ने कहा कि वांगचुक जिन मुद्दों को उठा रहे हैं, वे महत्वपूर्ण हैं और कांग्रेस भी लंबे समय से इनके पक्ष में रही है। हालांकि, उन्होंने वांगचुक से सवाल किया कि वे केवल शिक्षा या लद्दाख से जुड़े मुद्दों तक ही सीमित क्यों हैं? दीक्षित ने आरोप लगाया कि जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर उसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया और राज्य का दर्जा छीना गया, तब वांगचुक इस सरकार के साथ खड़े थे। उन्होंने पूछा कि तब लोकतंत्र के वे मूल्य कहां थे, जिन्हें आज वे बचाने की बात कर रहे हैं?

‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ और मौजूदा आंदोलन की तुलना
संदीप दीक्षित ने इस अनशन की तुलना अतीत के ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन से करते हुए इसे एक ‘मॉब’ (भीड़) की संज्ञा दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मुझे नहीं लगता कि ये किसी स्थापित मूल्य को लेकर वहां बैठे हैं। शायद उन्हें इसमें कोई राजनीतिक अवसर दिख रहा होगा।” दीक्षित के अनुसार, देश में सांप्रदायिकता, सरकारी एजेंसियों (ईडी-सीबीआई) का दुरुपयोग और धर्म के नाम पर हिंसा जैसे गंभीर मुद्दे भी मौजूद हैं, जिन पर वांगचुक की चुप्पी यह दर्शाती है कि उनका आंदोलन चुनिंदा विषयों तक ही सीमित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस आंदोलन की आलोचना नहीं कर रहे, बल्कि वांगचुक की राजनीतिक और वैचारिक तटस्थता पर अपनी राय रख रहे हैं।
लोकतांत्रिक मूल्यों की सर्वव्यापकता पर जोर
कांग्रेस नेता ने अंत में इस बात पर जोर दिया कि यदि सोनम वांगचुक वास्तव में प्रगतिशील विचारों और लोकतंत्र के योद्धा हैं, तो उन्हें केवल अपने हितों या क्षेत्र तक सीमित न रहकर देश के अन्य ज्वलंत विषयों पर भी उसी साहस के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी लंबे समय से उन मांगों को उठा रही है जो आज वांगचुक रख रहे हैं, लेकिन तब उन्हें समर्थन क्यों नहीं मिलता? दीक्षित का मानना है कि मुद्दों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय देश के व्यापक हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने पुन: आग्रह किया कि वांगचुक को अपना अनशन वापस ले लेना चाहिए और देश को जागरूक करने के लिए एक व्यापक आंदोलन की दिशा में सोचना चाहिए।
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