Ram Mandir Donation Row : राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित चंदे और मंदिर में आए चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर गुरुवार को राज्य के विभिन्न जिलों में कांग्रेस नेताओं ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान कांग्रेस ने भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार के अन्य संगठनों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस भगवान राम के नाम पर उन्होंने दशकों तक राजनीति की और सत्ता हासिल की, आज उसी पवित्र चंदे और चढ़ावे में चोरी और अनियमितता हो रही है। कांग्रेस ने इसे केवल आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किया गया घोर विश्वासघात बताया है।

पूर्व विधायकों ने उठाई निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग
दंतेवाड़ा में पूर्व विधायक चंदन कश्यप ने कहा कि राम मंदिर के नाम पर जुटाए गए धन के उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता होनी चाहिए, क्योंकि इसमें देश के गरीब, मजदूर और आम श्रद्धालुओं की मेहनत की कमाई शामिल है। उन्होंने सवाल किया कि यदि सब कुछ पारदर्शी है, तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इसकी स्वतंत्र जांच कराने से परहेज क्यों किया जा रहा है? इसी तरह, बालोद में पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर ने आरोप लगाया कि रामशिला पूजन के नाम से एकत्रित की गई 14 हजार करोड़ से अधिक की राशि का हिसाब देने में भाजपा और संघ विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर न्यास का गठन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की देखरेख में हुआ था, इसलिए इसकी नैतिक जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह की बनती है।

कांग्रेस के सवाल: चंदा चोरी पर भाजपा क्यों है खामोश?
कांग्रेस पार्टी ने अपनी प्रेसवार्ता में कई तीखे सवाल उठाए हैं। महासमुंद के वरिष्ठ नेता राजेंद्र तिवारी ने पूछा कि यदि अनियमितताएं नहीं हुई हैं, तो ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों ने इस्तीफा क्यों दिया? उन्होंने ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों को वित्तीय कुप्रबंधन का प्रमाण बताया। कांग्रेस का तर्क है कि ऑडिट से जुड़े मुद्दे और सार्वजनिक बयानों में अंतर इस मामले को और अधिक संदिग्ध बनाते हैं। जिला अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी ने कहा कि मंदिर बनाने के नाम पर चंदा लूटने वाले अब मंदिर बनने के बाद चढ़ावे की हेराफेरी कर रहे हैं, जिसे भाजपा का संरक्षण प्राप्त है।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें: न्यायिक जांच और फॉरेंसिक ऑडिट
इस मामले में कांग्रेस ने अपनी रणनीतिक मांगों को स्पष्ट करते हुए केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। पार्टी की प्रमुख मांगों में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक निष्पक्ष और स्वतंत्र न्यायिक जांच शामिल है। कांग्रेस ने मांग की है कि कथित घोटाले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। इसके साथ ही, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पुनर्गठन करने और मंदिर को प्राप्त हुए कुल चंदे, चढ़ावे और किए गए खर्च का एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की पुरजोर अपील की है। कांग्रेस का मानना है कि आस्था के इस मामले में किसी भी प्रकार की लीपापोती करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को आहत करेगी।












