Supreme Court on Railway : ‘सेकंड क्लास पैसेंजर’ शब्द पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, रेलवे को बदलनी होगी भाषा

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रेलवे में इस्तेमाल होने वाले ‘सेकंड क्लास पैसेंजर’ शब्द पर कड़ी आपत्ति जताते हुए भाषा को अधिक सम्मानजनक और समावेशी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक संस्थानों द्वारा उपयोग किए जाने वाले शब्द नागरिकों की गरिमा के अनुरूप होने चाहिए। अब सभी की नजर इस पर है कि रेलवे इस टिप्पणी के बाद अपनी शब्दावली में क्या बदलाव करता है और नए नाम क्या होंगे।

Supreme Court on Railway : भारतीय रेलवे में सुधार और यात्री सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रेलवे के आधिकारिक दस्तावेजों में ‘सेकंड क्लास पैसेंजर’ (द्वितीय श्रेणी यात्री) शब्द के प्रयोग पर कड़ी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भारत के इतिहास में वर्ग-विभाजन की जो पृष्ठभूमि रही है, उसे ध्यान में रखते हुए किसी भी नागरिक को ‘सेकंड क्लास’ कहना संविधान की मूल भावना और समानता के अधिकार के विपरीत है। अदालत ने निर्देश दिया है कि भविष्य में किसी भी यात्री को श्रेणी के नाम से संबोधित नहीं किया जाना चाहिए।

ads
Adst

श्रेणी का आधार यात्री नहीं, कोच होना चाहिए

सर्वोच्च न्यायालय ने रेलवे को निर्देश दिए हैं कि यात्री की श्रेणी का निर्धारण उसके द्वारा किए गए खर्च या सामाजिक स्तर से नहीं, बल्कि उस कोच (डिब्बे) से किया जाना चाहिए जिसमें वह यात्रा कर रहा है। अदालत के अनुसार, श्रेणी का उल्लेख हमेशा डिब्बे के संदर्भ में ही होना चाहिए, न कि यात्री के नाम के साथ। यह बदलाव भाषाई और सामाजिक दृष्टि से सम्मानजनक होगा। इसके अलावा, कोर्ट ने रेलवे सुरक्षा और यात्री सुविधाओं पर भी गंभीर टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि रेलवे मैनुअल के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के लिए कार्यबल (मैनपावर) में भारी वृद्धि की आवश्यकता है। आधुनिकीकरण के इस दौर में रेलवे को युवाओं को रोजगार देकर अपनी सेवाओं को और बेहतर बनाना चाहिए, जिससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

Adst

टिकट नहीं मिलने पर भी मिलेगा मुआवजा, कोर्ट ने पलटा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में यात्री की पत्नी को राहत प्रदान करते हुए रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पुराने फैसले को पलट दिया। मामले में मृतक के पास यात्रा के दौरान टिकट नहीं पाया गया था, जिसे आधार बनाकर मुआवजा देने से इनकार कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल टिकट न मिलने के आधार पर किसी यात्री को ‘बिना टिकट’ नहीं माना जा सकता। मृतक की पत्नी ने शपथ पत्र के माध्यम से स्पष्ट किया था कि उनके पति के पास वैध टिकट था, जो दुर्घटना के दौरान गुम हुए बैग के साथ कहीं खो गया।

8 लाख रुपये मुआवजे का ऐतिहासिक आदेश

अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि इस बात में कोई विवाद नहीं है कि मृतक ट्रेन में यात्रा कर रहा था और उसकी मृत्यु रेलवे की एक अप्रिय घटना (ट्रेन से गिरने) के कारण हुई। ऐसे में रेलवे अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता। सुप्रीम कोर्ट ने मृतक की पत्नी को 8 लाख रुपये का मुआवजा ब्याज सहित देने का निर्देश दिया है। यह फैसला रेलवे प्रशासन के लिए एक बड़ा संदेश है कि वे सुरक्षा और दावों के निपटारे में अधिक संवेदनशील बनें। यह आदेश उन लाखों यात्रियों के लिए एक बड़ी जीत है जो रेलवे की लचर कार्यप्रणाली के कारण न्याय के लिए दर-दर भटकते रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी रेलवे के पूरे तंत्र में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

Read More :  FIFA World Cup 2026 Final: स्पेन-अर्जेंटीना फाइनल के लिए न्यू जर्सी ही क्यों चुना, जानिए बड़ी वजह

Adst
Adst
Chandan Das

Chandan Das

Writer & Blogger

All Posts
पिछले पोस्ट
अगला पोस्ट

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • FIFA World Cup 2026
  • Thetarget365
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अन्य
  • अपराध
  • कारोबार
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • टेक
  • ट्रेंड
  • ताज़ा खबर
  • धर्म
  • पशु-पक्षी
  • मनोरंजन
  • मौसम
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विचार/लेख
  • शिक्षा और नौकरी
  • साहित्य/मीडिया
  • सेहत-फिटनेस
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • महाराष्ट्र
    • झारखंड
    • राजस्थान
    • ओडिशा

© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company

Contacts

Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.

Adst