Monkey Species: मध्य अफ्रीका के कांगो के घने रेनफॉरेस्ट में वैज्ञानिकों ने बंदर की एक ऐसी प्रजाति खोजी है, जिसे देखकर दुनिया भर के जीवविज्ञानी हैरान हैं। इस बंदर की सबसे विशिष्ट पहचान इसके ‘मोटे और चमकीले नारंगी होंठ’ हैं, जो इसके काले चेहरे पर किसी पेंटिंग की तरह उभरे हुए दिखाई देते हैं। यह बंदर घने काले बालों, लंबी पूंछ और ग्रे गालों के साथ बेहद अनोखा दिखता है। हालांकि, स्थानीय लोग इसे लंबे समय से जानते थे और अपनी स्थानीय भाषा में इसे ‘लिकवेली’ (Likweli) कहकर बुलाते थे, लेकिन इसे वैज्ञानिक रूप से एक स्वतंत्र और नई प्रजाति के तौर पर मान्यता दिलाने में शोधकर्ताओं को सालों की मशक्कत करनी पड़ी।

वैज्ञानिक नाम और पहचान की लंबी प्रक्रिया
इस नई प्रजाति का वैज्ञानिक नाम ‘कोलोबस कांगोएंसिस’ (Colobus congolensis) रखा गया है। लुकुरु वाइल्डलाइफ रिसर्च फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार, यह पिछले 75 वर्षों में अफ्रीका में खोजी गई बंदरों की पांचवीं नई प्रजाति है। शोधकर्ताओं के लिए यह समझना एक बड़ी चुनौती थी कि क्या यह कोलोबस बंदर की ही कोई सब-स्पीशीज़ है या फिर एक अलग प्रजाति। इसे साबित करने के लिए व्यापक फील्ड रिसर्च के साथ-साथ गहन DNA एनालिसिस का सहारा लिया गया। प्राइमेट रिसर्च (Primate Research) के क्षेत्र में इसे एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जो हमें प्रकृति की छिपी हुई विविधता को बेहतर तरीके से समझने में मदद करती है।

अंगूठा विहीन शरीर और खर्राटे जैसी अनोखी आवाज़
इस बंदर की शारीरिक बनावट भी काफी दिलचस्प है। इनके शरीर पर काले फर के अलावा पीठ पर एक स्पष्ट सफेद धब्बा होता है। एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इनमें अंगूठा लगभग नहीं के बराबर होता है। लेकिन इनकी सबसे चौंकाने वाली आदतें इनकी आवाज़ और व्यवहार से जुड़ी हैं। ये बंदर काफी गंभीर और गहरी दहाड़ने वाली आवाज़ें निकालते हैं। इसके अलावा, इनकी नाक से खर्राटे लेने की आदत भी शोधकर्ताओं के लिए कौतूहल का विषय है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इनके चेहरे का नारंगी रंग और ये विशेष आवाजें आपस में संवाद करने, अपनी प्रजाति को पहचानने और साथी चुनने की प्रक्रिया में बेहद अहम भूमिका निभाती हैं।
विलुप्ति का खतरा: ‘एंडेंजर्ड’ लिस्ट में शामिल करने की सिफारिश
नई प्रजाति के रूप में पहचान मिलने के साथ ही इसके अस्तित्व पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि लिकवेली बंदर कांगो के एक अत्यंत सीमित वन क्षेत्र में ही पाए जाते हैं। वनों की कटाई के कारण इनके रहने का प्राकृतिक आवास तेजी से सिमट रहा है, वहीं अवैध शिकार ने इनकी आबादी को खतरे में डाल दिया है। इन कारणों को देखते हुए वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति को तत्काल प्रभाव से ‘एंडेंजर्ड’ (Endangered) यानी लुप्तप्राय श्रेणी की सूची में डालने की जोरदार सिफारिश की है। यदि इनके संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह अनोखी प्रजाति इतिहास के पन्नों में खो सकती है।
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