Iran US Conflict: मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर अत्यंत भयावह स्थिति में पहुँच गया है। अमेरिका और ईरान के मध्य चल रहा सैन्य संघर्ष अब एक व्यापक और भीषण युद्ध में तब्दील हो चुका है। शनिवार को दोनों देशों ने एक-दूसरे के रणनीतिक सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को लक्षित करते हुए घातक मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस संघर्ष का मुख्य केंद्र दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) बना हुआ है। हाल ही में हुए अंतरिम युद्धविराम के टूटने के बाद से दोनों देशों के बीच यह टकराव और अधिक हिंसक हो गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल है।

अमेरिकी सैन्य अभियान: ईरान की सैन्य क्षमता को निशाना बनाने का दावा
‘अमेरिकी सेंट्रल कमांड’ द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, ईरान की सैन्य शक्ति को कमजोर करने के उद्देश्य से अमेरिका ने लगातार सातवीं रात एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया है। अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइल प्रणालियों ने ईरान के प्रमुख हथियार भंडारों, गुप्त भूमिगत बंकरों, निगरानी केंद्रों और उनकी नौसैनिक क्षमताओं को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है। इस निरंतर सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य ईरान की आक्रामक क्षमताओं को पूरी तरह नेस्तनाबूद करना बताया जा रहा है। वहीं, इस संघर्ष में अमेरिका को भी नुकसान उठाना पड़ा है, जहाँ सेना ने स्वीकार किया है कि इस जवाबी कार्रवाई के दौरान उनके कई सैनिक घायल हुए हैं।

मानवीय संकट और पड़ोसी देशों पर युद्ध का प्रभाव
युद्ध की विभीषिका केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दुष्प्रभाव पड़ोसी देशों तक भी पहुँच गए हैं। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी हुसैन केरमनपौर के अनुसार, 6 जुलाई से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में अब तक कम से कम 50 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इसके अलावा, 500 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। क्षेत्रीय प्रभाव की बात करें तो कुवैत, जॉर्डन और इराक जैसे देश भी इस युद्ध की चपेट में आ गए हैं। कुवैत ने अपनी सीमा में प्रवेश करने वाली मिसाइलों को मार गिराया है, लेकिन एक मिसाइल कुवैत के प्रमुख जल शोधन संयंत्र पर गिर गई, जिससे वहां भीषण आग लग गई। चूँकि कुवैत अपनी पीने योग्य पानी की 90% आवश्यकता इसी संयंत्र से पूरी करता है, ऐसे में वहां गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है।
वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप: कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल
इस युद्ध का सबसे गंभीर आर्थिक प्रभाव वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ा है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। यह वही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया के कुल कच्चे तेल की एक-तिहाई आपूर्ति होती है। इस नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें उछलकर 86 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस संघर्ष को जल्द नहीं रोका गया, तो दुनिया भर में ईंधन की भारी किल्लत हो सकती है, जो वैश्विक मंदी और महंगाई के एक नए दौर को जन्म दे सकती है।
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