US-Iran Talks: मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुका है। तेहरान ने एक बड़ा और रणनीतिक निर्णय लेते हुए अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की घोषणा की है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टेलीविजन के माध्यम से अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन ने लगभग एक महीने पूर्व हुए समझौते की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन किया है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं को निभाने में पूरी तरह विफल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप ईरान के पास समझौते से बाहर निकलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देश दोनों पक्षों को शांति वार्ता की मेज पर लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे थे।

सैन्य संघर्ष का सिलसिला: अमेरिका का लगातार सातवां हमला
दूसरी ओर, संघर्ष के मोर्चे पर स्थिति और अधिक भयावह बनी हुई है। ‘अमेरिकी सेंट्रल कमांड’ (CENTCOM) द्वारा जारी ताजा जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की सैन्य शक्ति को तहस-नहस करने के उद्देश्य से लगातार सातवीं रात अपने सैन्य अभियान को जारी रखा। शनिवार तड़के जारी आधिकारिक बयान में उल्लेख किया गया कि अमेरिकी वायुसेना और मिसाइल प्रणालियों ने ईरान के प्रमुख निगरानी केंद्रों, सैन्य साजोसामान, भूमिगत हथियार भंडारों और उनकी नौसैनिक क्षमताओं को मुख्य निशाना बनाया है। इस आक्रामक सैन्य कार्रवाई का प्राथमिक उद्देश्य ईरान की आक्रामक सैन्य क्षमताओं को लंबे समय के लिए पंगु बनाना है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को वार्ता के लिए दबाव बनाने की नीयत से कड़ी चेतावनी जारी की है, जिससे कूटनीतिक समाधान की संभावना फिलहाल धूमिल नजर आ रही है।

क्षेत्रीय अस्थिरता: कुवैत के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर हमले
इस युद्ध की आंच अब खाड़ी के अन्य पड़ोसी देशों तक भी पहुँचने लगी है। शनिवार को संघर्ष ने एक नया मोड़ तब लिया जब ईरान द्वारा किए गए जवाबी हमलों का असर कुवैत में देखा गया। कुवैत के अधिकारियों और ‘कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन’ ने पुष्टि की है कि ईरान की मिसाइलों ने कुवैत के समुद्री जल को मीठा बनाने वाले एक संयंत्र (डिसेलिनेशन प्लांट) और एक महत्वपूर्ण तेल प्रतिष्ठान को निशाना बनाया है।
हालांकि, सुरक्षा कारणों से कुवैत ने इन प्रतिष्ठानों की सटीक भौगोलिक स्थिति का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इन हमलों से क्षेत्र के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। इन हमलों के बाद से पूरे खाड़ी क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल आपूर्ति व बुनियादी संसाधनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न हो गई हैं। वैश्विक समुदाय अब इस बिगड़ते हुए सैन्य संघर्ष को रोकने के लिए तीव्र कूटनीतिक दबाव बना रहा है।
Read More : Ram Mandir Trust Case: निर्मोही अखाड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, फोरेंसिक ऑडिट की मांग











