CJP-Nadda Meeting: देश भर में नीट यूजी 2026 परीक्षा के दौरान हुए पेपर लीक और अन्य गंभीर परीक्षा संबंधी विवादों को लेकर चल रहे देशव्यापी छात्र आंदोलन के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। सोमवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में कॉजपा के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका विशेष रूप से शामिल रहे। इस अहम मुलाकात के दौरान संगठन की ओर से केंद्र सरकार के समक्ष तीन प्रमुख और गंभीर मांगें रखी गईं, जिन पर देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं।

स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा गया ज्ञापन और जेपी नड्डा की अपील
CJP के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ हुई चर्चा के दौरान एक विस्तृत लिखित ज्ञापन सौंपा, जिसमें संगठन की तीनों मुख्य मांगों का पूरा ब्योरा दिया गया था। यह बैठक ठीक उस समय संपन्न हुई जब हजारों की संख्या में छात्र और समर्थक संसद मार्च निकालते हुए परीक्षा प्रणाली में व्याप्त कथित अनियमितताओं के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे। मुलाकात के बाद जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी दी कि प्रदर्शनकारियों की तरफ से बातचीत का औपचारिक प्रस्ताव आया था, जिसके बाद यह सकारात्मक चर्चा हुई। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे अपना आंदोलन समाप्त कर दें और शांति बहाल करने में सहयोग करें।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की तीन प्रमुख और अहम मांगें
CJP प्रतिनिधिमंडल द्वारा सरकार के सामने मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगें रखी गई हैं। पहली मांग यह है कि प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बिना किसी शर्त और उनकी आवाजाही पर बिना किसी प्रकार की पाबंदी लगाए तत्काल रिहा किया जाए। दूसरी मांग के तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से तुरंत हटाया जाए या उनसे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा लिया जाए। इसके अलावा तीसरी मांग यह रखी गई है कि नीट पेपर लीक विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने जैसे कठोर कदम उठाने वाले सभी अभाग्य अभ्यर्थियों के पीड़ित परिवारों को सरकार एक-एक करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा प्रदान करे।
संसद मार्ग पर छात्रों का उग्र प्रदर्शन और पुलिसिया कार्रवाई
सोमवार को राजधानी दिल्ली में भारी संख्या में छात्र और CJP समर्थक संसद भवन की ओर मार्च निकालने के लिए सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों का मुख्य उद्देश्य परीक्षाओं में हुई धांधलियों की जवाबदेही तय करवाना और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करना था। हालांकि, संसद मार्ग के पास दिल्ली पुलिस ने कड़े सुरक्षा इंतजाम करते हुए कई स्तरों पर भारी बैरिकेडिंग कर इस मार्च को रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की भी हुई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। बाद में जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों से प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक हटाया गया, बावजूद इसके कई छात्र मौके पर डटे रहे।
अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान की उच्चस्तरीय बैठक और आंदोलन की पृष्ठभूमि
इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच करीब साढ़े तीन घंटे तक चली एक लंबी उच्चस्तरीय बैठक भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि इस बैठक में किन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी बाहर नहीं आई है। आपको बता दें कि CJP ने गत 6 जून से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के खिलाफ यह बड़ा आंदोलन छेड़ रखा है। संगठन का कड़ा आरोप है कि नीट- यूजी 2026 पेपर लीक और अन्य तकनीकी गड़बड़ियां शिक्षा व्यवस्था की गहरी पोल खोलती हैं।
सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और अस्पताल में भर्ती
उल्लेखनीय है कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक बीते 20 जून को जंतर-मंतर पर चल रहे इस छात्र आंदोलन से जुड़े थे। सरकार की तरफ से कोई भी ठोस आश्वासन न मिलने के बाद उन्होंने 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। सोमवार को उनकी इस भूख हड़ताल का 23वां दिन पूरा हुआ। स्वास्थ्य अत्यधिक बिगड़ने के बाद पुलिस और प्रशासन उन्हें निकालकर सफदरजंग अस्पताल ले गया था। CJP ने इस कार्रवाई को पूरी तरह जबरन और दमनकारी बताते हुए उनकी तुरंत और बिना शर्त रिहाई की मांग एक बार फिर जोर-शोर से दोहराई है।
CJP द्वारा बातचीत को सकारात्मक बताना और आगे की रणनीति
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ हुई इस मुलाकात के बाद CJP के प्रतिनिधिमंडल ने पूरी बातचीत को बेहद सकारात्मक बताया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने मीडिया को जानकारी दी कि जेपी नड्डा ने उनकी बातों को ध्यान से सुना है और कॉजपा की मांगों पर सरकार के शीर्ष नेतृत्व के साथ चर्चा करने के लिए कुछ समय की मांग की है। रांका ने यह भी खुलासा किया कि सरकार से बातचीत का माध्यम स्थापित करने के लिए नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त ने रविवार देर रात ही उनसे संपर्क साधा था। संगठन ने अपने सभी समर्थकों और छात्रों से शांति बनाए रखने और सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार करने की अपील की है।












