Dhamtari News : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नवागांव में एक महिला की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर कई घंटे तक विवाद की स्थिति बनी रही। ग्रामीणों और समाज के कुछ लोगों ने परिवार के ईसाई मिशनरी से जुड़े होने का आरोप लगाते हुए गांव की परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार किए जाने की मांग की। घटना के बाद गांव में तनाव जैसी स्थिति बन गई। हालांकि, बाद में स्थानीय स्तर पर बैठक आयोजित कर मामले का समाधान निकाला गया।
55 वर्षीय पियन साहू का हुआ निधन
जानकारी के अनुसार नवागांव निवासी 55 वर्षीय पियन साहू का गुरुवार को निधन हो गया था। वह तलाकशुदा थीं और अपने भाई उमेश साहू के साथ रहती थीं। महिला की मौत के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कीं। इसी दौरान ग्रामीणों और समाज के लोगों की ओर से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई गई, जिसके चलते मामला विवाद में बदल गया।
ग्रामीणों ने गांव की परंपरा का दिया हवाला
ग्रामीणों का कहना था कि गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर समाज के लोग सामूहिक रूप से अंतिम संस्कार की व्यवस्था में सहयोग करते हैं। इसके तहत लकड़ी और अन्य जरूरी सामग्री जुटाने से लेकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में समाज के सदस्य शामिल होते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि संबंधित परिवार लंबे समय से सामाजिक आयोजनों और गांव की पारंपरिक गतिविधियों से दूरी बनाए हुए था, इसलिए अंतिम संस्कार की पद्धति को लेकर आपत्ति सामने आई।
परिवार के मिशनरी से जुड़ाव का दावा
विवाद के दौरान ग्रामीणों की ओर से परिवार के करीब आठ वर्षों से ईसाई मिशनरी से जुड़े होने का दावा किया गया। इसी आधार पर कुछ लोगों ने अंतिम संस्कार की धार्मिक प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। मृतका के भाई उमेश साहू ने भी बताया कि उनका परिवार लगभग आठ साल से ईसाई मिशनरी से जुड़ा हुआ था और इसी वजह से अंतिम संस्कार को लेकर गांव में विवाद उत्पन्न हुआ।
सरपंच और समाज प्रमुखों ने बुलाई बैठक
विवाद बढ़ने के बाद मामले को सुलझाने के लिए स्थानीय स्तर पर बैठक बुलाई गई। बैठक में गांव के सरपंच, ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष और समाज के प्रमुख लोगों के साथ परिवार के सदस्य शामिल हुए। कई घंटे तक चली चर्चा के दौरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। परिवार की ओर से भविष्य में समाज के साथ मिलकर रहने और सामाजिक कार्यक्रमों में सहभागिता करने की बात कही गई।
सहमति के बाद खत्म हुआ अंतिम संस्कार विवाद
बैठक के बाद परिवार और ग्रामीणों के बीच सहमति बनने की बात सामने आई। इसके बाद अंतिम संस्कार को लेकर चला विवाद समाप्त हुआ और महिला का हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। परिवार की ओर से भी गांव तथा समाज के आयोजनों में आगे शामिल होने पर सहमति जताई गई। इस घटनाक्रम को स्थानीय स्तर पर सामाजिक समन्वय स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा गया।
गंगाजल और तुलसी से कराई गई प्रक्रिया
सहमति बनने के बाद ग्रामीणों ने परिवार के सदस्यों के पैर धोए और उन्हें गंगाजल पिलाया। इसके बाद तुलसी पत्र खिलाया गया और तिलक लगाया गया। परिवार के सदस्यों को मंदिर ले जाकर पूजा-अर्चना भी कराई गई। इसके अलावा गंगाजल का छिड़काव किया गया। स्थानीय लोगों ने इस पूरी प्रक्रिया को परिवार के दोबारा सामाजिक रूप से जुड़ने की प्रक्रिया से जोड़ा।
सिहावा थाना क्षेत्र का है पूरा मामला
यह पूरा मामला धमतरी जिले के सिहावा थाना क्षेत्र से संबंधित है। मृतका के भाई ने बताया कि महिला की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। बाद में समाज के लोगों के साथ हुई बैठक में परिवार ने साथ रहने पर सहमति जताई, जिसके बाद अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामले का समाधान स्थानीय स्तर पर आपसी सहमति के जरिए हुआ है।
स्थानीय सहमति से मामले का हुआ समाधान
नवागांव की यह घटना अंतिम संस्कार की परंपरा, सामाजिक सहभागिता और धार्मिक पहचान से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को सामने लाती है। विवाद के बीच स्थानीय लोगों ने बैठक के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया। परिवार की ओर से समाज के साथ आगे जुड़ने की सहमति के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हुई। घटना के बाद गांव में स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
Read More : Saldha Shiv Teerth : सिर्फ 80 परिक्रमा से मिलेगा 1 करोड़ पुण्य, शंकराचार्य ने बताया सलधा तीर्थ का रहस्य