Agneshwar Mahadev Temple : हिंदू पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का पवित्र महीना देवों के देव महादेव यानी भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे उत्तम और शुभ माना जाता है। इस वर्ष सावन का महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक रहेगा। इस पूरे एक महीने के दौरान देशभर के सभी छोटे-बड़े शिव मंदिरों में शिव भक्तों का तांता लगा रहता है और भारी भीड़ उमड़ती है।

यदि आप भी इस पावन सावन के महीने में किसी बेहद खास, अनोखे और चमत्कारी शिव मंदिर के दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, तो राजस्थान के खूबसूरत हिल स्टेशन माउंट आबू में स्थित ऐतिहासिक अग्नेश्वर महादेव मंदिर आपके लिए एक बेहतरीन और आध्यात्मिक विकल्प साबित हो सकता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके गर्भगृह में आमने-सामने दो शिवलिंग स्थापित हैं, जो इसे पूरे देश के बेहद दुर्लभ और विशिष्ट शिव मंदिरों की सूची में शामिल करते हैं। आइए इस आर्टिकल के माध्यम से इस अद्भुत मंदिर से जुड़ी खास मान्यताओं और इतिहास के बारे में विस्तार से जानते हैं।

अरावली की शांत वादियों में बसा है यह प्राचीन और पवित्र शिव मंदिर
राजस्थान के इकलौते और बेहद लोकप्रिय हिल स्टेशन माउंट आबू में स्थित अग्नेश्वर महादेव मंदिर, देलवाड़ा से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर अरावली पर्वतमाला की गोद में, चारों तरफ फैली शांत और खूबसूरत प्राकृतिक वादियों के बीच बहुत ही मनमोहक तरीके से बसा हुआ है। सावन के महीने में यहां की छटा देखते ही बनती है और प्राकृतिक सुंदरता के बीच भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने के लिए दूर-दूर से भक्त खिंचे चले आते हैं। सावन के हर सोमवार और पूरे महीने भर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है जो विधि-विधान के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
एक ही गर्भगृह में दो शिवलिंग, यही है इस मंदिर की सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता
अग्नेश्वर महादेव मंदिर की सबसे हैरान करने वाली और अनोखी बात यह है कि यहां एक ही गर्भगृह के अंदर दो अलग-अलग शिवलिंग आमने-सामने बहुत ही करीने से स्थापित किए गए हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, इन दोनों पावन शिवलिंगों के साथ-साथ दो-दो संपूर्ण शिव परिवारों की मनमोहक प्रतिमाएं भी बेहद खूबसूरती के साथ विराजमान हैं। धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार, इस तरह की दुर्लभ व्यवस्था भगवान शिव और माता शक्ति के मिलन तथा उनके विशेष स्वरूप का बहुत बड़ा प्रतीक मानी जाती है। यही मुख्य वजह है कि इस मंदिर का धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व अन्य सामान्य शिव मंदिरों की तुलना में कहीं अधिक अलग और विशिष्ट माना जाता है।
स्कंद पुराण में भी मिलती है इस प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर की रोचक कहानी
धार्मिक कथाओं और ग्रंथों के अनुसार, अग्नेश्वर महादेव मंदिर के गौरवशाली इतिहास के बारे में प्राचीन स्कंद पुराण में भी विस्तार से उल्लेख मिलता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम के गुरु महर्षि विश्वामित्र और आयुर्वेद के प्रणेता तथा देवताओं के वैद्य भगवान धन्वंतरि ने इसी पवित्र स्थान पर बैठकर कठिन तपस्या की थी। इस वजह से यह स्थान केवल साधारण शिवभक्तों के लिए ही नहीं, बल्कि प्राचीन ऋषि परंपरा और सनातन संस्कृति से जुड़ी गहरी आस्था का भी एक बहुत बड़ा और प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां आकर लोगों को एक अलग ही प्रकार की आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है।
कभी नहीं सूखता मंदिर परिसर में स्थित यह पवित्र और चमत्कारी जलकुंड
इस प्राचीन मंदिर परिसर के अंदर बना हुआ एक पवित्र जलकुंड यहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण और गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहता है। स्थानीय लोगों की पुरानी मान्यताओं के अनुसार, इस चमत्कारी कुंड से चाहे जितना भी पानी निकाल लिया जाए, लेकिन इसका जल स्तर कभी भी कम नहीं होता और यह कभी नहीं सूखता है। यही एक मुख्य कारण है कि लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मानते और इसे बहुत श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं।
Read More : Surajpur Crime: नाबालिग दुष्कर्म मामले का फरार आरोपी गिरफ्तार, पुलिस को मिली बड़ी सफलता












